अर्चना भट्टाचार्य
| अर्चना भट्टाचार्य | |
|---|---|
| निवास | भारत |
| राष्ट्रीयता | भारतीय |
| संस्थान | इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ जीओमग्नेटिज्म |
| शिक्षा | दिल्ली विश्वविद्यालय |
| प्रसिद्धि | योण क्षेत्र भौतिकी और जीओमग्नेटिज्म |
अर्चना भट्टाचार्य (जन्म १९४८) एक भारतीय भौतिक विज्ञानी[] हवं। उह आयनोस्फेरिक भौतिकी, भू-चुंबकत्व अउर अंतरिक्ष मौसम के क्षेत्र मा विशेषज्ञता रखथिन अउर भारतीय भू-चुंबकत्व संस्थान, नवी मुंबई की निदेशक रहिन।
शिक्षा
[सम्पादन | स्रोत सम्पादित करैं]भट्टाचार्य दिल्ली विश्वविद्यालय से १९६७ अउर १९६९ मा क्रमस: भौतिकी मा बी.एससी. (ऑनर्स) अउर एम.एससी. पूरा किहिन। उह १९६४–६९ तक राष्ट्रीय विज्ञान प्रतिभा छात्रवृत्ति भी पाइन। उह १९७५ मा नॉर्थवेस्टर्न विश्वविद्यालय से भौतिकी मा पीएच.डी. उपाधि प्राप्त किहिन, जेमे उह सैद्धांतिक संघनित पदार्थ भौतिकी के क्षेत्र मा काम किहिन।
करियर
[सम्पादन | स्रोत सम्पादित करैं]भट्टाचार्य १९७८ मा भारतीय भू-चुंबकत्व संस्थान (आईआईजी), मुंबई मा जुड़िन। १९८६–८७ के दौरान उह यूनिवर्सिटी ऑफ इलिनॉय, अर्बाना-शैंपेन मा के.सी. येह के समूह के साथ काम किहिन, अउर १९९८–२००० के दौरान उह मैसाचुसेट्स, अमेरिका मा एयर फोर्स रिसर्च लेबोरेटरी मा वरिष्ठ एनआरसी रेजिडेंट रिसर्च एसोसिएट रहिन। उह २००५–२०१० तक आईआईजी की निदेशक रहिन। अब उह आईआईजी मा एमेरिटस वैज्ञानिक हवं।
प्रो. अर्चना भट्टाचार्य १९६९ मा दिल्ली विश्वविद्यालय से भौतिकी मा एम.एससी. उपाधि प्राप्त किहिन, जवन राष्ट्रीय विज्ञान प्रतिभा छात्रवृत्ति के साथ रही। उह १९७५ मा नॉर्थवेस्टर्न विश्वविद्यालय से भौतिकी मा पीएच.डी. उपाधि प्राप्त किहिन, जेमे उह सैद्धांतिक संघनित पदार्थ भौतिकी के क्षेत्र मा काम किहिन।
उह १९७८ मा भारतीय भू-चुंबकत्व संस्थान (आईआईजी) मा जुड़िन। १९८६–८७ के दौरान, उह यूनिवर्सिटी ऑफ इलिनॉय, अर्बाना-शैंपेन मा प्रो. के.सी. येह के समूह के साथ काम किहिन। १९९८–२००० के दौरान उह मैसाचुसेट्स, अमेरिका मा एयर फोर्स रिसर्च लेबोरेटरी मा वरिष्ठ एनआरसी रेजिडेंट रिसर्च एसोसिएट रहिन। उह २००५ मा आईआईजी की निदेशक बनिन अउर २०१० तक सेवा दिहिन। अपने निदेशक काल मा, आईआईजी के एक नया क्षेत्रीय केंद्र, जवन डॉ. के.एस. कृष्णन भू-चुंबकीय अनुसंधान प्रयोगशाला, इलाहाबाद के नाम से हवे, शुरू भवा, जेमे ऊपरी वायुमंडल अउर पुराभू-चुंबकीय अनुसंधान खातिर प्रयोगात्मक सुविधन स्थापित किहिन गइन। अब उह आईआईजी मा INSA वरिष्ठ वैज्ञानिक हवं।
आईआईजी मा, प्रो. भट्टाचार्य पृथ्वी के आयनोस्फीयर मा प्लाज़्मा अस्थिरता से उत्पन्न आयनोस्फेरिक अनियमितता अउर रेडियो तरंगन के आयनोस्फेरिक अनियमितता द्वारा प्रकीर्णन के अध्ययन पर काम शुरू किहिन। उह घना आयनोस्फेरिक अनियमितता परत के कारण तेज़ scintillations खातिर मॉडल विकसित किहिन अउर GPS डाटा मा TEC उतार-चढ़ाव से phase scintillations के अलग करे खातिर तरीका विकसित किहिन। उह चुम्बकीय तूफान के कारण भूमध्यरेखीय आयनोस्फीयर मा उत्पन्न नया plasma bubble के पहचान खातिर भी तरीका विकसित किहिन, जवन आयनोस्फेरिक scintillations के spaced receiver मापन पर आधारित हवे। उह विद्युतचुंबकीय Rayleigh-Taylor अस्थिरता के माध्यम से भूमध्यरेखीय plasma bubble (EPB) के विकास खातिर एक सिद्धांत प्रस्तावित किहिन। उह scintillation अवलोकन से पहिला प्रमाण दिहिन कि EPB भूमध्यरेखीय F क्षेत्र के शीर्ष भाग मा ज्यादा संरचित हवे बजाय ओकर शिखर के नजदीक, जवन L-band scintillations के पूर्वानुमान मा महत्व रखत हवे।
प्रो. भट्टाचार्य २००७–२०११ के दौरान International Association for Geomagnetism and Aeronomy (IAGA) मा विकासशील देशन खातिर Interdivisional Commission की अध्यक्ष रहिन। उह Journal of Geophysical Research–Space Physics (American Geophysical Union), Pramana, अउर Indian Journal of Radio & Space Physics के संपादकीय मंडल मा भी सेवा दिहिन। प्रो. भट्टाचार्य १९६९ मा दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा डॉ. के.एस. कृष्णन स्वर्ण पदक से सम्मानित भइं। उह २००८ मा भारतीय भूभौतिकी संघ द्वारा प्रोफेसर के.आर. रामनाथन स्मारक व्याख्यान अउर पदक से भी सम्मानित भइं। उह भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी, भारतीय विज्ञान अकादमी, राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी (भारत) अउर भारतीय भूभौतिकी संघ की फेलो हवं।
पुरस्कार अउर सम्मान
[सम्पादन | स्रोत सम्पादित करैं]अनुसंधान रुचि
[सम्पादन | स्रोत सम्पादित करैं]- भूमध्यरेखीय आयनोस्फीयर मा प्लाज़्मा अस्थिरता
- रेडियो तरंगन के माध्यम से आयनोस्फीयर के अध्ययन
- आयनोस्फीयर पर अंतरिक्ष मौसम के प्रभाव
- भू-चुंबकीय क्षेत्र के स्थानिक-अस्थायी परिवर्तन