आनंदीबाई जोशी
| आनंदीबाई जोशी | |
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आनंदीबाई जोशी क एक चित्र फोटो | |
| जनम | यमुना जोशी ३१ मार्च १८६५ कल्याण, बॉम्बे प्रेसीडेंसी, ब्रिटिश भारत |
| मौत | २६ फरवरी १८८७ (उम्र २२ वर्ष) पूना, बॉम्बे प्रेसीडेंसी, ब्रिटिश भारत |
| निवास | पफकीप्सी, न्यूयॉर्क, संयुक्त राज्य अमेरिका |
| अल्मा मेटर | विमेन्स मेडिकल कॉलेज ऑफ पेनसिल्वेनिया |
| जिवनसाथी | गोपालराव जोशी |
| दसखत | |
आनंदीबाई जोशी (३१ मार्च १८६५ – १ फरवरी १८८७) पुणे सहर मा जनमी पहिली भारतीय अउरत रहीं, जिनहन डॉक्टरी की डिग्री लिहिन। जउन जमाने मा अउरतन की सिच्छा भी मुस्किल रही, ऐसे मा बिदेस जाके डॉक्टरी की डिग्री हासिल करना अपने-आप मा एक मिसाल अय। उनकी सादी नौ बरिस की छोटी उमर मा उनसे करीब २० बरिस बड़े गोपालराव से होइ गई रही। जब १४ बरिस की उमर मा उ माई बनिन अउर उनकी एकमात्र संतान की मृत्यु १० दिन मा ही होइ गई त उनका बहुत बड़ा आघात लगा। आपन संतान खोए के बाद उनहन इ परण किहिन कि उ एक दिन डॉक्टर बनइहैं अउर ऐसी असमय मौत का रोके की कोसिस करइहैं। उनके मरद गोपालराव उनका भरपूर सहयोग दिहिन अउर उनकी हिम्मत बढ़ाइन।
आनंदीबाई जोशी का ब्यक्तित्व अउरतन खातिर परेरणा का सोत अय। उनहन सन् १८८६ मा आपन सपना साकार किहिन। जब उनहन इ फैसला किहिन, समाज मा उनकी बहुत आलोचना भई कि एक बियाही हिंदू अउरत बिदेस (पेन्सिल्वेनिया) जाके डॉक्टरी पढ़े। मुदा आनंदीबाई एक दृढ़निश्चयी अउरत रहीं अउर उनहन आलोचनावन की जरा भी परवाह नाहीं किहिन। इसीलिए उनका पहिली भारतीय महिला डॉक्टर होए का गौरव मिला। डिग्री पूरी करे के बाद जब आनंदीबाई भारत वापस लउटिन त उनका सेहत बिगड़े लगा अउर बाईस बरिस की छोटी उमर मा ही उनकी मृत्यु होइ गई।
सिच्छा
[सम्पादन | स्रोत सम्पादित करैं]गोपालराव आनंदीबाई का डॉक्टरी पढ़ाई करे खातिर उत्साहित किहिन। सन १८८० मा उनहन एक मसहूर अमेरिकी मिशनरी रॉयल वाइल्डर का एक चिट्ठी भेजिन, जेमा उनहन संयुक्त राज्य मा दवाई पढ़ाई मा आनंदीबाई की रुचि के बारे मा बताइन। वाइल्डर उनका पत्राचार प्रिंसटन की मिशनरी समीक्षा मा छपवाइन। थॉडिसीया कार्पेन्टर, जउन न्यू जर्सी के रोज़ेल की रहे वाली रहीं, उनहन इ पढ़ा अउर अमेरिका मा आनंदीबाई खातिर रहे की जगह देए की पेसकस किहिन।
जब जोशी दंपत्ति कलकत्ता मा रहे, आनंदीबाई का सेहत कमजोर होत जात रहा। उ कमजोरी, लगातार सिरदर्द, कभी-कभी बुखार अउर साँस की तकलीफ से पीड़ित रहीं। सन १८८३ मा गोपालराव का सेरामपुर मा बदली होइ गई, अउर उनहन कमजोर सेहत के बावजूद आनंदीबाई का मेडिकल पढ़ाई खातिर अमेरिका भेजे का फैसला किहिन।
थॉर्बोर्न नाव के एक चिकित्सक जोड़े आनंदीबाई का पेन्सिल्वेनिया के महिला चिकित्सा महाविद्यालय मा आवेदन करे का सुझाव दिहिन। पच्छिम मा उच्च सिच्छा हासिल करे की आनंदीबाई की योजना जानके रूढ़िवादी भारतीय समाज उनका बहुत दबावे की कोसिस किहिस।
आनंदीबाई सेरामपुर कॉलेज (पश्चिम बंगाल) के हॉल मा समुदाय का संबोधित किहिन, जेमा उनहन अमेरिका जाए अउर मेडिकल डिग्री लेए के फैसले का समझाइन। उनहन भारत मा महिला डॉक्टरन की जरूरत पर जोर दिहिन अउर भारत मा अउरतन खातिर एक मेडिकल कॉलेज खोले के आपन लछ्य के बारे मा बात किहिन। उनके भासन से पूरे भारत मा माली सहयोग आए लगा।
अमेरिकी जिनगी
[सम्पादन | स्रोत सम्पादित करैं]आनंदीबाई कोलकाता (कलकत्ता) से पानी के जहाज से न्यूयॉर्क गइन। न्यूयॉर्क मा थिओडिसिया कार्पेन्टर जून १८८३ मा उनका लेने आइन। आनंदीबाई पेन्सिल्वेनिया के वूमन मेडिकल कॉलेज मा भर्ती भईं, जउन दुनिया का दूसरा महिला चिकित्सा कार्यक्रम रहा। कॉलेज की डीन राहेल बोडले उनका नामांकित किहिन।
आनंदीबाई १९ बरिस की उमर मा आपन चिकित्सा परसिच्छण सुरू किहिन। अमेरिका मा ठंडे मौसम अउर अनजान खाने के कारन उनका सेहत खराब होइ गवा। उनका टीबी होइ गवा फिर भी उनहन ११ मार्च १८८५ का एम.डी. की डिग्री हासिल किहिन। उनकी थीसिस का बिसय रहा "आर्यन हिंदुवन के बीच परसूति"। उनके स्नातक पर रानी विक्टोरिया उनका एक बधाई संदेस भेजिन।
भारत वापसी
[सम्पादन | स्रोत सम्पादित करैं]
सन १८८६ के आखिर मा आनंदीबाई भारत लउटिन, जहाँ उनका भव्य सुआगत भवा। कोल्हापुर की रियासत उनका स्थानीय अल्बर्ट एडवर्ड अस्पताल की महिला वार्ड के चिकित्सक परभारी के रूप मा नियुक्त किहिस।
अगले बरिस, २६ फरवरी १८८७ का आनंदीबाई की २२ बरिस की उमर मा टीबी से मृत्यु होइ गई। उनकी मृत्यु पर पूरे भारत मा सोक व्यक्त किया गवा। उनकी राख थियोडिसिया कारपेंटर के पास भेजी गई, जिनहन उनका आपन परिवार के कब्रिस्तान, न्यूयॉर्क के पुफेकीसी ग्रामीण कब्रिस्तान मा रखिन। शिलालेख मा लिखा है कि आनंदी जोशी एक हिंदू ब्राह्मण लइकी रहीं, जउन बिदेस मा सिच्छा हासिल करिके मेडिकल डिग्री पाए वाली पहिली भारतीय अउरत रहीं।
विरासत
[सम्पादन | स्रोत सम्पादित करैं]सन १८८८ मा अमेरिकी नारीवादी लेखिका कैरोलिन वेल्स हीली डैल आनंदीबाई की जीवनी लिखिन। डॉल आनंदीबाई से परिचित रहीं अउर उनका बहुत सम्मान करत रहीं। हालाँकि जीवनी के कुछ बिंदु — खासकर गोपालराव जोशी के कठोर बरताव — जोशी के दोस्तन के बीच बिवाद का कारन बने।
दूरदर्शन, एक भारतीय सार्वजनिक सेवा परसारक, उनकी जिनगी पर आधारित "आनंदी गोपाल" नाव की एक हिंदी श्रृंखला परसारित किहिस, जेका निर्देसन कमलाकर सारंग किहिन। श्रीकृष्ण जनार्दन जोशी आपन मराठी उपन्यास आनंदी गोपाल मा उनकी जिनगी का एक काल्पनिक लेख लिखिन, जेका राम जी जोगलेकर एही नाव के एक नाटक मा रूपांतरित किहिन।
डॉ. अंजलि कीर्तन डॉ. आनंदीबाई जोशी की जिनगी पर बड़े पैमाने पर सोध किहिन अउर उनके जमाने अउर उपलब्धियन के बारे मा एक मराठी किताब "डॉ. आनंदीबाई जोशी काळ आणि कर्तृत्व" लिखिन।
लखनऊ मा एक गैर-सरकारी संगठन, इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च एंड डॉक्यूमेंटेशन इन सोशल साइंसेज (IRDS), भारत मा चिकित्सा विज्ञान का आगे बढ़ावे मा उनके सुरुआती योगदान के सम्मान मा आनंदीबाई जोशी पुरस्कार देत है। एके अलावा महाराष्ट्र सरकार अउरतन के सेहत पर काम करे वाली नौजवान अउरतन खातिर उनके नाव पर एक फेलोशिप स्थापित किहिस। उनके सम्मान मा शुक्र गरह पर एक गड्ढे का नाव उनके नाव पर "जोशी" राखा गवा है।
३१ मार्च २०१८ का गूगल उनकी १५३वीं जयंती पर उनका गूगल डूडल से सम्मानित किहिस।
सन २०१९ मा मराठी मा उनकी जिनगी पर आनंदी गोपाल नाव की एक फिलिम बनी।
संदर्भ
[सम्पादन | स्रोत सम्पादित करैं]- https://www.smithsonianmag.com/science-nature/19th-century-lady-doctor-ushered-indian-women-medicine-180964613/
- https://web.archive.org/web/20131203002240/http://hindi.webdunia.com/%E0%A4%86%E0%A4%A8%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%80-%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%88-%E0%A4%9C%E0%A5%8B%E0%A4%B6%E0%A5%80/%E0%A4%86%E0%A4%A8%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%80-%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%88-%E0%A4%9C%E0%A5%8B%E0%A4%B6%E0%A5%80-%E0%A4%AA%E0%A4%B9%E0%A4%B2%E0%A5%80-%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A5%80%E0%A4%AF-%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A4%BE-%E0%A4%A1%E0%A5%89%E0%A4%95%E0%A5%8D%E2%80%8D%E0%A4%9F%E0%A4%B0-1071029062_1.htm
- https://web.archive.org/web/20190327090330/https://www.lokmatnews.in/india/anandi-joshi-became-indias-first-lady-doctor-google-doodle/
- https://www.indiatoday.in/education-today/gk-current-affairs/story/who-is-anandi-gopal-joshi-to-whom-google-dedicates-a-doodle-1201625-2018-03-31
- https://web.archive.org/web/20131105141151/http://irdsindia.com/irdsawards2011.html