इंदिरा पी. पी. बोरा
| इंदिरा पी. पी. बोरा | |
|---|---|
| जनम | १९४९ गोलाघाट, असम, भारत |
| राष्ट्रियता | भारतीय |
| रोजगार | सत्रीया नृत्यांगना |
| पुरस्कार | पद्म श्री (२०२०) संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार (१९९६) |
इंदिरा पी. पी. बोरा एक्कय प्रसिद्ध भारतीय सत्रीया नृत्यांगना अहैं, जउन असम, भारत से सम्बन्ध राखत हइन। ऊ सत्रीया नृत्य कय संरक्षण, प्रचार-प्रसार अउर विकास मा महत्वपूर्ण भूमिका निभाइन हइन। सत्रीया नृत्य, जऊन असम क एक शास्त्रीय नृत्य शैली हवे, ओकरा राष्ट्रीय अउर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलावै मा इंदिरा बोरा क बहुत बड़ा योगदान मानल जात हवे।
इंदिरा बोरा कय जनम १९४९ मा गोलाघाट, असम मा भवा रहा।[१] बचपन से ही उनकर रुझान कला अउर संस्कृति क ओर रहा। ऊ आपन उच्च शिक्षा पूरी करै के बाद नृत्य के क्षेत्र मा आपन कैरियर बनाइन। सत्रीया नृत्य के अलावा, ऊ भरतनाट्यम अउर कूचिपूड़ी जइसन अन्य शास्त्रीय नृत्य शैलीन मा भी प्रशिक्षण पाइन। ऊ प्रसिद्ध गुरु रुक्मिणी देवी अरुंडेल से लगभग १३ साल तक भरतनाट्यम सीखिन अउर गुरु वेमपति चिन्ना सत्यम से कूचिपूड़ी क तालीम पाइन।[२]
कैरियर
[सम्पादन | स्रोत सम्पादित करैं]इंदिरा पी. पी. बोरा सत्रीया नृत्य कय राष्ट्रीय अउर अंतरराष्ट्रीय मंच प पहुँचावै मा अग्रणी रहिन। ऊ न्यूज़ीलैंड, संयुक्त राज्य अमेरिका अउर वियतनाम जइसन कई देशन मा सत्रीया नृत्य क प्रदर्शन कइके असम क सांस्कृतिक धरोहर क विश्व स्तर प प्रसिद्ध कइलीन।[३]
उनकर नृत्य शैली मा पारम्परिकता अउर आधुनिकता क सुंदर मेल देखाय देत हवे। ऊ ना केवल एक उत्कृष्ट कलाकार हइन, बल्कि एक समर्पित गुरु भी हइन। ऊ बहुत सिष्यन क प्रशिक्षण दिहिन अउर सत्रीया नृत्य क नई पीढ़ी तक पहुँचावै मा महत्वपूर्ण योगदान दिहिन।[४]
योगदान
[सम्पादन | स्रोत सम्पादित करैं]इंदिरा बोरा सत्रीया नृत्य क शास्त्रीय रूप क संरक्षित करै अउर ओकरे मंचीय प्रस्तुति क विकसित करै मा विशेष भूमिका निभाइन हइन। ऊ सत्रीया नृत्य क एक धार्मिक परम्परा से निकाल के आधुनिक मंच पर प्रस्तुत कइके एक नई पहचान दिहिन। उनकर प्रयासन से सत्रीया नृत्य क लोकप्रियता बढ़ी अउर ई राष्ट्रीय स्तर पर एक मान्यता प्राप्त शास्त्रीय नृत्य बन गवा।
पुरस्कार अउर सम्मान
[सम्पादन | स्रोत सम्पादित करैं]- संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार – १९९६
- राज्य विष्णु राभा पुरस्कार – २००४
- जानकी पुरस्कार
- संस्कृति विभाग, भारत सरकार क सीनियर फेलोशिप
- गुरु गोपीनाथ पुरस्कार – २०१९[५]
- पद्म श्री – २०२०[६]
सन्दर्भ
[सम्पादन | स्रोत सम्पादित करैं]- ↑ "इंदिरा पी. पी. बोरा - प्रोफाइल" (PDF). संगीत नाटक अकादमी. ई १ अप्रैल २०२६ को पुनः प्राप्त कीन गा .
{{cite web}}: CS1 maint: date auto-translated (कड़ी) - ↑ "सत्रिया हमेशा एक संगीतमय कला रूप रही". द इकॉनॉमिक टाइम्स. २०१७-०९-०३. ई १ अप्रैल २०२६ को पुनः प्राप्त कीन गा .
{{cite web}}: CS1 maint: date auto-translated (कड़ी) - ↑ "साक्षात्कार: इंदिरा पी. पी. बोरा". Narthaki. ई १ अप्रैल २०२६ को पुनः प्राप्त कीन गा .
{{cite web}}: CS1 maint: date auto-translated (कड़ी) - ↑ "Stepping beyond tradition". द हिंदू. २५ अप्रैल २०१४. ई १ अप्रैल २०२६ को पुनः प्राप्त कीन गा .
{{cite web}}: CS1 maint: date auto-translated (कड़ी) - ↑ "Guru Gopinath Award". द हिंदू. ३१ अक्टूबर २०१९. ई १ अप्रैल २०२६ को पुनः प्राप्त कीन गा .
{{cite web}}: CS1 maint: date auto-translated (कड़ी) - ↑ "Padma Awards 2020". भारत सरकार. ई १ अप्रैल २०२६ को पुनः प्राप्त कीन गा .
{{cite web}}: CS1 maint: date auto-translated (कड़ी)