उषा बारले
| उषा बारले | |
|---|---|
| जनम | २ मई १९६८ छत्तीसगढ़, भारत |
| रोजगार | पंडवानी गायिका |
| पुरस्कार | पद्मश्री पुरस्कार (२०२३) |
उषा बारले (जन्म २ मई १९६८) एक प्रसिद्ध भारतीय पंडवानी गायिका अहैं।[१] छत्तीसगढ़ की एक पारंपरिक प्रदर्शनकारी लोक कला रूप की भारतीय पंडवानी लोक गायिका अहैं। उहाँ कपालिक शैली मा प्रदर्शन खातिर जानी जात अहैं। २०२३ मा उहाँ के पंडवानी गायन मा योगदान खातिर भारत के चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्मश्री पुरस्कार मिलिस,[२] जेके भारतीय राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा प्रदान भवा।[३]
जीवन परिचय
[सम्पादन | स्रोत सम्पादित करैं]उषा बारले के जनम २ मई १९६८ का भिलाई छत्तीसगढ़, भारत मा भवा। उहाँ के बचपन से ही संगीत में रुचि रही। उ सात साल के उमर से पांडवनी गावै लागिन अऊर बाद मा पद्म विभूषण तीजनबाई के अधीन प्रशिक्षण लिहिन।
उषा के बाल विवाह अमरदास बारले से भवा। उहाँ सात बरिस के उमिर मा ही गुरु मेहतरदास बघेलजी के अधीन पंडवानी गायन के अध्ययन शुरू करीं। इसके बाद उहाँ तीजनबाई के साथ अध्ययन करत पंडवानी कला के नाटकीय पेचीदगिन के समझिन। उषा बरले बहुत संघर्ष किहिन हैं। अपने संघर्ष के दिनन मा ऊषा बरले भी सड़क के किनारे बइठ के फल बेचत रहीं।[४] उनके पिताजी का उनकर गायन अऊर वादन पसंद नाहीं रहा। ओकर पिता गुस्सा मा ओका कुँआ मा फेंक दिहिन लेकिन उ अडिग रही।
उषा बारले अपने घर मा बड़ी बेटी रहिन। उनके पिता के ५० वर्ष के बाद दूसरी पत्नी से संतान भई रहिस। एही से उहाँ के पिता, अपने न रहने के बाद बेटी के सहारा मिले खातिर, उषा के बियाह जल्दी करा दिहिन।[५] उषा बारले के बियाह केवल २ बरिस के उमिर मा मोहल्ला के ही अमरदास बारले से भवा। उषा अपन पति के संग गिल्ली डंडा अउर भौंरा खेलत-खेलत बड़ी भईं। उन्हीं के संग उहाँ पंडवानी गायन के भी सीखन। अमरदास बारले भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) मा कर्मी अहैं अउर उहाँ भी पंडवानी गीत गावत अहैं।
करियर
[सम्पादन | स्रोत सम्पादित करैं]उषा बारले पंडवानी गायन में विशेष स्थान राखत अहैं। उहाँ के गायन शैली में महाभारत के प्रसंगन के भावपूर्ण प्रस्तुति अहै। उहाँ के मंच पर खास पहचान मिलिस। उषा अपन मूल राज्य छत्तीसगढ़ के अलावा न्यूयॉर्क, लंदन अउर जापान समेत कई अन्य जगहन पर भी प्रदर्शन कर चुकी अहैं।
पुरस्कार अउर सम्मान
[सम्पादन | स्रोत सम्पादित करैं]- २०२३ – राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथ से पद्मश्री पुरस्कार, राष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली।
- २००६ – गणतंत्र दिवस पर कार्यक्रम पेश करके नई दिल्ली मा प्रथम स्थान मिलिस।
- अंडमान-निकोबार द्वीप समूह मा सम्मानित।
- २००७ – छत्तीसगढ़ शासन द्वारा सम्मानित।
- भिलाई इस्पात संयंत्र द्वारा दाऊ महासिंग चंद्राकर सम्मान।
- मिनीमाता सम्मान से सम्मानित।
- छत्तीसगढ़ लोक कला महोत्सव मा भुईयां सम्मान, रायगढ़ मा चक्रधर सम्मान अउर कानपुर मा मालवा सम्मान (मायावती द्वारा)।
यह भी देखो
[सम्पादन | स्रोत सम्पादित करैं]बाहरी कड़ी
[सम्पादन | स्रोत सम्पादित करैं]संदर्भ
[सम्पादन | स्रोत सम्पादित करैं]- ↑ "Singers Usha Barle, Suman Kalyanpur receive Padma Awards". ThePrint. २२ मार्च २०२३. ई ३१ मार्च २०२५ को पुनः प्राप्त कीन गा .
{{cite web}}: CS1 maint: date auto-translated (कड़ी) - ↑ "Padma Awards 2023: Meet awardees honoured in the field of art". The Indian Express. २६ जनवरी २०२३. ई ३१ मार्च २०२५ को पुनः प्राप्त कीन गा .
{{cite web}}: CS1 maint: date auto-translated (कड़ी) - ↑ Tripathi, Bhupesh (२३ मार्च २०२३). "छत्तीसगढ़ की उषा बारले को मिला पद्मश्री पुरस्कार, देश-विदेश में पंडवानी गायन कर बनाई पहचान". Patrika News (हिन्दी भाषा में). ई ३१ मार्च २०२५ को पुनः प्राप्त कीन गा .
{{cite web}}: CS1 maint: date auto-translated (कड़ी) - ↑ कुमार, मुनेश्वर (२२ जून २०२३). "Pandwani Singer Usha Barle: पंडवानी गायिका पद्मश्री उषा बारले कौन? जिनके घर गृह पहुंचे गृह मंत्री अमित शाह". Navbharat Times (हिन्दी भाषा में). ई ३१ मार्च २०२५ को पुनः प्राप्त कीन गा .
{{cite web}}: CS1 maint: date auto-translated (कड़ी) - ↑ "KHABREN24 » उषा बारले : पिता ने कुएं में फेंका, फिर भी गाती रहीं पंडवानी:पद्मश्री मिला तो पुराने दिनों को याद कर छलक गए उषा के आंसू". KHABREN24. ३१ जनवरी २०२३. ई ३१ मार्च २०२५ को पुनः प्राप्त कीन गा .
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