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एना चांदी

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माननीय न्यायमूर्ति
Anna chandy judge
न्यायमूर्ति श्रीमती अन्ना चांडी

न्यायमूर्ति अन्ना चांडी (४ मई १९०५ – २० जुलाई १९९६) भारत की पहली महिला न्यायाधीश रहिन। ऊ १९३७ मा भारत मा पहिली बार महिला जज बनिन अउर १९५९ मा उच्च न्यायालय क न्यायाधीश बनिन। ऊ दुनिया क शुरुआती महिला उच्च न्यायालय न्यायाधीशन मा से एक रहिन।

अन्ना चांडी क जनम 1905 मा त्रावणकोर राज्य मा भवा अउर उनका पालन-पोषण त्रिवेंद्रम मा भवा। ऊ पहिले एंग्लिकन सीरियन क्रिश्चियन रहिन, बाद मा ऊ कैथोलिक धर्म अपना लिहिन।

1926 मा गवर्नमेंट लॉ कॉलेज, तिरुवनंतपुरम से कानून की पढ़ाई पूरी कइके ऊ अपन राज्य क पहिली महिला बनिन जउन कानून की डिग्री पाइन। 1929 से ऊ वकालत शुरू कइ दिहिन।

1931–32 मा ऊ त्रावणकोर विधानसभा क चुनाव लड़ीं अउर जीत गइन। ऊ 1932 से 1934 तक विधायक रहिन।

1937 मा ऊ मुनसिफ (न्यायाधीश) बनाईं गइन, जउन कि भारत मा कउनो महिला क पहिला जज बनइ क उदाहरण रहा। 1948 मा ऊ जिला जज बनिन।

1959 मा ऊ केरल उच्च न्यायालय क जज बनाईं गइन, जउन कि भारत क पहिली महिला उच्च न्यायालय न्यायाधीश बनइ क गौरव रहा। ऊ 1967 तक सेवा दिहिन।

रिटायरमेंट क बाद ऊ भारत का विधि आयोग मा काम कइलीं अउर अपन आत्मकथा आत्मकथा (1973) लिखिन। 1996 मा उनका निधन होइ गवा।

१९२८ मा ऊ न्यायिक सेवा मा आयिन। त्रावणकोर क दीवान सर सी.पी. रामास्वामी अय्यर द्वारा उनका मुंसिफ (जिला न्यायाधीश) बनाय गवा।

१९३७ मा ऊ भारत क पहिली महिला न्यायाधीश बनिन। बाद मा १९४८ मा जिला जज बनिन।

१९५९ मा ऊ केरल उच्च न्यायालय क न्यायाधीश बनाईं गइन, जउन कि भारत क पहिली महिला उच्च न्यायालय न्यायाधीश बनइ क गौरव रहा। ऊ ५ अप्रैल १९६७ तक एह पद पर काम कइलीं।

उनका काम से भारत मा महिला लोगन क कानूनी क्षेत्र मा आगे बढ़े क प्रेरणा मिली।

अन्ना चांडी महिला अधिकार खातिर हमेशा आवाज उठाइन। ऊ चाहत रहिन कि महिला लोग भी समाज अउर कानून मा बराबरी से हिस्सा लेइं।

उनका जीवन बहुत संघर्ष भरा रहा, लेकिन ऊ अपनी मेहनत से सफलता हासिल कइलीं अउर दूसरन खातिर रास्ता बनाइन।

२० जुलाई १९९६ का उनका निधन होइ गवा।

https://web.archive.org/web/20131203020347/http://books.google.co.in/books?id=Xyr6gXmva-gC


खाँचा:भारत की पहली महिलाएँ