एरुतुकली

एरुतुकली (जेनका एरुथु कली भी कहा जात ह) भारत देस के केरल राज्य के उत्तर मलाबार इलाका की एक प्रसिद्ध लोक कला अहइ। ई लोक नाच मुख्य रूप से माविलर समुदाय द्वारा किहा जात ह।
परिचय
[सम्पादन | स्रोत सम्पादित करैं]एरुतुकली केरल के उत्तर मलाबार क्षेत्र की एक पारंपरिक लोक कला अहइ। ई कला कासरगोड अउ कन्नूर ज़िला के पहाड़ी इलाका मा रहे वाले माविलन समुदाय द्वारा निभाई जात ह। ई लोक नाच मलयालम पंचांग के तुलम महीना के दसवें दिन गांवन मा किहा जात ह।[१]
एरुतुकली नाच खेती-किसानी मा आगे चलिके समृद्धि होए, इही कामना से किहा जात ह।[१]
नाम क अर्थ
[सम्पादन | स्रोत सम्पादित करैं]‘एरुतु’ सब्द का मतलब होय ह बड़ा बैल अउ ‘कली’ का मतलब खेल या नाच।[१] एरुतुकली मा मुख्य पात्र एडुपुकला (नकली बैल) अहइ, जे बांस, भूसा, कपड़ा अउ लकड़ी के सिर से बनावल जात ह।[१]
कथा अउ मान्यता
[सम्पादन | स्रोत सम्पादित करैं]कहल जात ह कि माविलर समुदाय के पुरखा लोग जब ज़मींदारन (जनमी) खातिर पहाड़ी इलाका मा धान की खेती (पोनम) करत रहेन, तब दुई जने लोगन क सुब्रह्मण्य मंदिर से बैल खरीदै खातिर भेजा गवा।[१] लौटत बखत थकान से ऊ लोग राह मा सो गइन अउ जब जागेन त बैल गायब रहेन। बहुत खोज के बादो जब बैल न मिलेन, तब ऊ लोगन कसम खाइन कि हर बरिस एरुतुकली करिहन।[१] बाद मा बैल वापस मिल गइन अउ ऊ लोग आपन कसम निभाइन।
प्रदर्शन
[सम्पादन | स्रोत सम्पादित करैं]एरुतु की पोशाक पहिरै से पहिले कलाकार आपन पुरखन क ताजा धान से बने पोहे अउ मुरमुरे अउ फल अर्पित कइके पूजा करत हइन।[२]
कलाकार बांस, भूसा, कपड़ा अउ लकड़ी से बने बड़े नकली बैल क उठाइके ताल-मेल से घर-घर जात हइन।[३]
ई नाच मा चेंडा अउ चेम्पिला जइसन पारंपरिक बाजा इस्तेमाल किहा जात ह।[१] खेती की सुरुआत से जुड़े गीतन के संग नाच होत ह।[१] ई लोक कला तुलम महीना के दसवें दिन शुरू होइके तीसरे दिन बाघ द्वारा बैल पकड़े जाए वाले दृश्य से खतम होत ह।[३]
ई बैल उन सब घरन मा ले जावल जात ह जउन खेती-किसानी से जुड़े होत हइन।[४] घरवाले कलाकारन क उपहार भी देत हइन।[१]
संदर्भ
[सम्पादन | स्रोत सम्पादित करैं]- 1 2 3 4 5 6 7 8 9 "ഗോത്ര സ്മൃതികളുണർത്തി എരുതുകളി." keralakaumudi.com (मलयालम भाषा में). Kerala Kaumudi. २०२३-०४-०७ के मूल से पुरालेखित. ई २०२३-०४-०७ को पुनः प्राप्त कीन गा .
{{cite web}}: CS1 maint: date auto-translated (कड़ी) - ↑ "പാരമ്പര്യത്തിന്റെ നേർക്കാഴ്ചയായി എരുതുകളി". ManoramaOnline (मलयालम भाषा में). Malayala Manorama. २०२३-०४-०७ के मूल से पुरालेखित. ई २०२३-०४-०७ को पुनः प्राप्त कीन गा .
{{cite web}}: CS1 maint: date auto-translated (कड़ी) - 1 2 "എരുതുകളി നിറഞ്ഞാടി". Deshabhimani (मलयालम भाषा में). २०२३-०४-०७ के मूल से पुरालेखित. ई २०२३-०४-०७ को पुनः प्राप्त कीन गा .
{{cite web}}: CS1 maint: date auto-translated (कड़ी) - ↑ "പത്താമുദയത്തിനെത്തി 'എരുതും മരമീടനും'". keralakaumudi.com. २०२३-०४-०७ के मूल से पुरालेखित. ई २०२३-०४-०७ को पुनः प्राप्त कीन गा .
{{cite web}}: CS1 maint: date auto-translated (कड़ी)