ओत्रार
ओत्रार या ओत्यारार (कज़ाख: ओतिरार; पुरान तुर्की: केञु तारमन), जऊन फाराब के नाम से भी जानल जात रहा, मध्य एशिया का एक उजाड़ सहर (घोस्ट टाउन) अहै। ई सहर कज़ाखस्तान में रेशम मार्ग (सिल्क रोड) के किनारे बसल रहा।[१]
ओत्रार मध्य एशिया के इतिहास में एक बहुत महत्वपूर्ण सहर रहा। ई बसल अउर खेती-बाड़ी वाली सभ्यतन के सीमा पर स्थित रहा। ई एक बड़े नखलिस्तान अउर राजनीतिक इलाका का केंद्र रहा, अउर एतना महत्वपूर्ण जगह पर बसल रहा कि कज़ाखस्तान का चीन, यूरोप, नज़दीकी अउर मध्य पूर्व, साइबेरिया अउर यूराल क्षेत्र से जोड़त रहा।

नाम
[सम्पादन | स्रोत सम्पादित करैं]एह इलाका में पहिला जानल-पहचानल राज्य चीनी विद्वानन के लेखन में कांगजु (Kangju) के नाम से मिलत अहै। ई राज्य सिर दरिया (जऊन कांग नदी के नाम से भी जानल जात रही) के आसपास केंद्रित रहा। कांगजु पहली सदी ईसा पूर्व से पाँचवीं सदी ईस्वी तक कायम रहा। एकर राजधानी बित्यान में या ओकर आसपास बताई जात अहै। कई अलग-अलग आक्रमणकारी लहरन के असर में आके कांगजु टूट गवा अउर कई स्वतंत्र राज्यन में बँट गवा, जऊन मुख्य रूप से सिर दरिया घाटी अउर ओकर सहायक नदियन केलेस अउर अतिसी के किनारे बसल रहे।
फाराब के पुरान नामन के निर्धारण से जुड़ी जानकारी भी मिलत अहै। मानल जात अहै कि ओत्रार अउर नखलिस्तान के कुछ अउर सहरन से मिलल सिक्कन का एक समूह एह रिकॉर्डन के समय का अहै। एह सिक्कन के एक ओर धनुष के रूप में तुर्गेशी प्रतीक बनल अहै, अउर दूसर ओर शेर की तस्वीर अहै। दूसर तरह के कुछ सिक्कन के पीछे की ओर “X” के निशान मिलत अहैं; मानल जात अहै कि ई सिक्का किसी स्थानीय शासक के टकसाल से निकला अहै।
एह बात का भी अनुमान लगावल जात अहै कि दुसरे प्रकार के सिक्का कांगु तारबान नाम के तुर्की राज्य के शासकन द्वारा ढलवाए गए रहे, जउनका लोग कांगर कहलावत रहे। सिक्कन के आधार पर मानल जात अहै कि छठवीं से आठवीं सदी के बीच कांगु तारबान पर कांगर वंश के स्थानीय राजवंश का शासन रहा। एह समय राजधानी तारबान नाम के सहर में रही, जऊन बाद में तुरारबंद कहलाया अउर आगे चलके ओकर नाम ओत्रार पड़ गवा।
सुनहरी गिरोह (गोल्डन होर्ड) के जमाना से ओत्रार के खंडहर लोगन का ध्यान खींचत रहे अहैं, काहे कि पुरान शासकन के खजाना अउर गाड़े गए सोने के सिक्कन अउर गहना के बारे में कई तरह के अफवाह फैलल रहे। एह तरह के किंवदंतियन का आधार शायद पुरातात्विक खुदाई में मिलल अलग-अलग सिक्कन अउर गहनन से पक्का होत अहै। [२] नवीं से दसवीं सदी के बीच, कई स्रोत ओत्रार का जिक्र इस्पिदजाब के सहरन में एक के रूप में करत अहैं। ई शायद एह कारण से अहै कि सहर पहिले खिलाफत के अधीन आवा अउर बाद में सामानी शासकन के शासन में चला गवा। पहिले जइसे, ओत्रार जिला का केंद्र बना रहा, जऊन इलाका चारों ओर “लगभग एक दिन के सफर” के बराबर फैलल बतावल जात अहै, जउन बात इतिहासकारन बार-बार लिखे अहैं।
ओत्रार अपना सिक्का ढाल करे वाला सहर भी रहा। ई एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक केंद्र रहा, जिहाँ महान दार्शनिक अबू नस्र अल-फाराबी का जन्म भवा, अउर इस्लामी संस्कृति के प्रमुख प्रतिनिधि अरिस्तान-बाब इहाँ उपदेश देत रहे। [३]
स्थान
[सम्पादन | स्रोत सम्पादित करैं]सिर दरिया नदी ओत्रार अउर पूरा इलाका के जीवन में बहुत खास भूमिका निभावत रही। एकर पानी से खेती-बाड़ी किही जात रही। ई नदी मछरी से भरपूर रही, अउर एकर किनारन पर घनी वनस्पति पाई जात रही, जिहाँ बहुत से पक्षी अउर जानवर भी रहत रहे।
ओत्रार का जिक्र कई मध्यकालीन अरबी, फारसी अउर तुर्की लेखकन के रचना में मिलत अहै। एह स्रोत ओत्रार का नाम झेतिसु (सात नदी) के सहरन में एक के रूप में लेत अहैं। ई सहर अलग-अलग भौगोलिक परिदृश्य के संगम पर बसल रहा अउर महान रेशम मार्ग (ग्रेट सिल्क रोड) के कारवां रास्तन के चौराहा पर स्थित रहा।
ओत्रार दू बड़ी नदियन के मिलन स्थल पर बसल होइ के, एक बड़े कृषि क्षेत्र का केंद्र रहा। कराताऊ पहाड़न के तराई के पास होइ के ई सहर घास के मैदानन में घूमे वाला खानाबदोश लोगन के सहारा बने वाला किला भी रहा।
ओत्रार से आरिस नदी के किनारे-किनारे सड़कन ताराज़, बलासागुन अउर आगे शिनजियांग तक जात रहीं। सिर दरिया के किनारे एक पुरान रास्ता शाश, सोग्द, अउर आगे मर्व अउर निशापुर तक जात रहा, अउर एक दूसर रास्ता अराल सागर अउर यूराल की ओर जात रहा। एक अउर मशहूर रास्ता किज़िलकुम रेगिस्तान से होइ के पच्छिम की ओर ख्वारज़्म अउर आगे वोल्गा इलाका, काला सागर अउर काकेशस तक जात रहा।
ओत्रार का नखलिस्तान दक्खिनी कज़ाखस्तान प्रांत के कुसुलकुम ज़िला में स्थित अहै। ई शिमकेंट से करीब १२० किलोमीटर उत्तर-पच्छिम, अउर तुर्किस्तान से लगभग ५० किलोमीटर दूर अहै। सच कहें त कई तरह के आपदा अउर लड़ाईन के असर ई सहर पर पड़ा। आज, एक समय के समृद्ध सहर के जगह पर बस घास से ढँकल खंडहर बचल अहैं।
पहिली बेर ओत्रार के नखलिस्तान आवे वाला आदमी, इहाँ के बहुते उजाड़ शहरन, बस्तियन, किला अउर चौकीन के अवशेष देख के अचरज में पड़ जात अहै। मुख्य सिंचाई नहरन आज सूखल खेतन से कट गइन अहैं, अउर इनकर टूटी फूटी तलहटी सदियन से पानी ना देखिस।
ओत्रार का नखलिस्तान एक अकेल जगह ना अहै, बल्कि ई एक बड़ा इलाका अहै, जिहाँ कई सहर अउर कस्बा बसल रहे। प्राचीन बस्तियन के जगह पर बनल हर एक टीला आज अपना अलग नाम रखत अहै—अल्तिनतोबे, जलपाक-तोबे, कुइयुक-मरदान-तोबे अउर पचाकची-तोबे। पुरान जमाना में इन सब के अलग-अलग नाम रहे, जऊन आज भुला गइन अहैं। बस तीन सहरन के नाम, जऊन पांडुलिपि स्रोत में मिलत अहैं, आज के खंडहरन से पहिचानल जा सकत अहैं।
इतिहास
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ओत्रार सहर का इतिहास आकेमेनिद साम्राज्य के समय तक जात अहै, जब ई पाराब के नाम से जानल जात रहा। पुरान फारसी स्रोत में एहका पाराब / फाराब (कभी-कभी फारयाब अउर पारयाब) कहल गवा अहै। ई नाम फारसी भाषा का आम भौगोलिक नाम अहै, जऊन मतलब अहै—“नदी के पानी मोड़ के सींचल गवा इलाका।” फारयाब नाम उत्तरी अफगानिस्तान के एक प्रांत का भी अहै। तेरहवीं सदी तक जक्सार्तेस (सिर दरिया) नदी के किनारे बसल फाराब, ओत्रार के नाम से जानल जाए लागा। [४] मंगोल अउर तैमूरी दौर
१२१८ में, लगभग ४५० आदमी वाला एक मंगोल व्यापारी कारवां ओत्रार पहुँचा, जेमन में चंगेज़ ख़ान का एक दूत भी सम्मिलित रहा। ओत्रार के गवर्नर इनालचुक, जऊन ख्वारज़्मी साम्राज्य के सुल्तान मुहम्मद द्वितीय का मामा रहा, कारवां पर जासूसी का आरोप लगाइस अउर सबका गिरफ्तार कर लिहिस। सुल्तान मुहम्मद की सहमति से पूरा कारवां मरवा दिहा गवा। [५] एह घटना के उत्तर में चंगेज़ ख़ान तीन राजदूतन का एक दस्ता सुल्तान मुहम्मद के पास भेजिस अउर इनालचुक का सजा माँगिस। लेकिन सुल्तान मुहम्मद मुसलमान दूत का सिर कटवा दिहिस अउर बाकी दू मंगोल दूतन के दाढ़ी मुंडवा दिहिस। एह अपमान से चंगेज़ ख़ान भड़क उठा अउर बदला खातिर हमला किहिस।
१२१९ में चंगेज़ ख़ान ओत्रार के पाँच महीना तक घेराबंदी किहिस। आखिरकार सहर के दीवार तोड़ दीहिन गइन, इनालचुक का फाँसी दीहिन गइन, अउर सहर के लोगन का भारी कत्लेआम भवा।
नखलिस्तान के कई सहर एह तबाही के बाद कबहूँ उबर ना पाइन अउर उजाड़ होइ गइन। पर ओत्रार फिर से उठ खड़ा भवा। चंगेज़ ख़ान के मरन के बाद चले गृहयुद्धन के समय में ओत्रार दुबारा राजनीतिक अउर आर्थिक केंद्र बन गवा। तेरहवीं सदी के बीच तक ई पच्छिम से पूरब जाए वाला व्यापार के रास्ते पर एक बड़ा व्यापारिक सहर बन चुका रहा।
चौदहवीं सदी के दूसरे आधा में दक्खिनी कज़ाखस्तान तैमूर (तामेरलेन) के अधिकार में आ गवा। फरवरी १४०५ में, जब तैमूर ओत्रार में आपन सेना जुटावे आवा, तब ऊ सर्दी पकड़ लिहिस अउर ओत्रार के एक महल में ओकर मौत होइ गई।
उज़्बेक, कज़ाख अउर जूंगार दौर
तैमूर के मरन के बाद संघर्ष अउर बढ़ गवा। एह हालात में अबूʼल-ख़ैर ख़ान कई जनजातियन पर कब्जा किहिस अउर नया उज़्बेक ख़ानात बनाइस। चंगेज़ ख़ान के अउर वंशज भी एह इलाका पर दावा करत रहे। एह से सोलहवीं अउर सत्रहवीं सदी में कज़ाख स्टेपी अउर सिर दरिया घाटी पर अधिकार खातिर लगातार लड़ाई चलत रही, खासकर कज़ाख ख़ानात अउर जूंगार सामंती शासकन के बीच।
एह सब के बावजूद, जूंगारन के दक्खिनी कज़ाखस्तान जीत के नाकार्य कोशिश तक ओत्रार में कुछ हद तक स्थिरता बनी रही। बाद में लंबा विद्रोह चला, जउनसे इलाका अउर सहरन की अर्थव्यवस्था कमजोर पड़ गई। जइसे-जइसे रेशम मार्ग का यूरेशियाई भाग अपन महत्त्व खोए लागा, ओत्रार भी पिछड़त चला गवा। [६] सत्रहवीं अउर अठारहवीं सदी में सिंचाई व्यवस्था धीरे-धीरे बंद होइ गई, अउर तेमिर-अरिक नहर का निचला भाग सूख गवा। अठारहवीं सदी के आखिर तक ओत्रार में बस ४० परिवार बचे रहे, जबकि चौदहवीं से सत्रहवीं सदी के बीच इहाँ शायद ५,००० से ७,००० लोग बसत रहे। सिंचित्त इलाका भी घट के लगभग ५ वर्ग किलोमीटर रह गवा।
सन्दर्भ
[सम्पादन | स्रोत सम्पादित करैं]- ↑ https://www.iranicaonline.org/articles/otrar/
- ↑ https://anotherglobaleater.wordpress.com/2024/07/04/the-ghosts-of-otrar/
- ↑ https://stantrips.com/kazakhstan/ruins-of-otrar.php
- ↑ https://www.worldheritagesite.org/former-tentative/archaeological-sites-of-otrar-oasis/
- ↑ https://e-history.kz/en/history-of-kazakhstan/show/9520
- ↑ https://landcruisingadventure.com/history-of-kazakhstan-at-otrar/