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ख़ीवा

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खीवा (उज़बेक: Хива, अंग्रेज़ी: Khiva) मध्य एशिया के उज़बेकिस्तान देस के ख़ोरज़्म परांत मँ स्थित एक ऐतिहासिक महत्त्व का सहर अहै। एह इलाका मँ हजारन बरिस स लोग बसत आएन, बाकिर ई सहर तब जादा मशहूर भवा जब ई ख़्वारेज़्म अउर ख़ीवा ख़ानत की राजधानी बना।

पुरातात्विक सबूत के हिसाब से, ई सहर छठवीं सदी ईसवी (CE) से पहिले से मौजूद रहिस, बाकिर सब से पहिले एकर ज़िक्र दसवीं सदी मा दुई अरब यात्री लोगन कइके दर्ज कीन्ह गवा। सोलहवीं सदी मा, ई खीवा के खानते के राजधानी बनि गवा। सत्रहवीं सदी तक, ई सहर गुलाम बज़ार के रूप मा बढ़ै लाग। सिरिफ उन्नीसवीं सदी के पहिले आधे हिस्सा मा ही, लगभग दस लाख फ़ारसी (पर्शियन), औ बेहिसाब रूसी (रशियन) लोगन क गुलाम बनाय के हुवाँ ले जाया गवा अउर बेच दीन गवा। हुवाँ मा से बहुत जनेन क ईचान-क़ला (राजमहल) के भीतरी दीवालन वाली इमारत क बनावै मा लगावा गवा, जौन ई ऐतिहासिक सहर के सब से खास अउर मनमोहक चीज़ अहइ।

ईचान-क़ला के भीतरी बारहीं सदी (12th century) के पुरान इमारतें बाटीं, बाकिर ओकर ज़्यादतर महल, मसजिद, मदरसा, मकबरा, औ आन बनावटें 1780 से 1850 के बीचे के हइन। ई उ समय रहिस जब ई सहर कराकुम के आर-पार जाँय वाली कारवाँ के रस्ता पर ब्यापार के अड्डा औ किला के रूप मा फलि-फूलिस। खीवा मा मध्य एशिया के इस्लामी वास्तुकला के कुछ सब से बढ़िया, सुरक्षित नमूने मौजूद अहइन।

कुन्या अर्क (पुरान किला) नाम के जगह पर खीवा के सब से पुरान बनावट, साथे-साथे उन्नीसवीं सदी के इमारतें भी बाटीं। अठारहवीं सदी के आख़िरी हिस्सा के जुम्मा मसजिद मा 200 से ज़्यादे नक्कासीदार काठ के खम्भा लाग हइन, जेहमें से कुछ त दसवीं सदी के अहइन; ई खम्भा अपनी नक्कासी औ सजावट के अच्छाई के कारण जाने जात हइन।

चउदहीं सदी के कवी औ पहलवान पहलवन महमूद के सम्मान मा बनवाया गवा पहलवन महमूद के मकबरा (जेका 1810 से 1825 के बीच दुबारा बनवावा गवा) क सामान्य रूप से ईचान-क़ला के सब से प्रभावशाली इमारत मानल जात अहइ। ई शाही कब्रिस्तान के बीच मा अहइ, जेह मा गुंबददार मकबरा औ बहुतै सुंदर डिज़ाइन वाली टाइल लगी अहइ।

ताश हौलि (1830 से 1838; 'पत्थर के महल') ख़ास कइके अपने हरम वाला आँगन (Harem court) के कारण ख़ूब जानल जात अहइ, जेह मा सुंदर नक्कासी वाले खम्भा औ रंगीन गुंबददार छत लाग हइन। ओकर भीत पर खीवा के ख़ास नीले-सफ़ेद रंग के मजोलिका टाइल लगी अहइ।

इस्लाम ख़्वाजा मदरसा औ मीनार (1908 से 1910) मध्य एशिया के इस्लामी दौर के आख़िरी प्रमुख वास्तुकला के उपलब्धि अहइन। 148 फीट (45 मीटर) ऊँचा ई मीनार खीवा के सब से ऊँच बनावट अहइ। 1990 मा ईचान-क़ला क यूनेस्को के विश्व धरोहर स्थल घोषित कीन्ह गवा।

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  1. https://www.google.co.in/books/edition/Narrative_of_a_Journey_from_Heraut_To_Kh/JkRCAAAAcAAJ?hl=en&gbpv=1&dq=khiva&pg=PR48&printsec=frontcover
  2. https://www.google.co.in/books/edition/Narrative_of_a_Journey_from_Heraut_To_Kh/JkRCAAAAcAAJ?hl=en&gbpv=1&dq=khiva&pg=PR48&printsec=frontcover
  3. https://www.google.co.in/books/edition/A_ride_to_Khiva_travels_and_adventures_i/JGkBAAAAQAAJ?hl=en&gbpv=1&dq=khiva&pg=PR14&printsec=frontcover
  4. https://www.google.co.in/books/edition/The_Russian_Expedition_to_Khiva_in_1873/Kv1WAAAAMAAJ?hl=en&gbpv=1&dq=khiva&pg=PR7&printsec=frontcover
  5. https://www.nationalgeographic.com/travel/best-of-the-world-2026/article/khiva-uzbekistan
  6. https://www.euronews.com/travel/2025/12/02/from-samarkand-to-khiva-uzbekistans-unesco-landmarks-trace-the-story-of-the-silk-road