ख़ोक़न्द
खोकन्द (उज़्बेक: Қўқон, ताजिक: Хӯқанд, फारसी: خوقند, अँगरेज़ी: Kokand) मध्य एशिया मा, पूरबी उज़्बेकिस्तान के फ़रगाना प्राण्त मा बसल एक सहिर हवे। ई फ़रगाना घाटी के पच्छिमी किनारे पर बसल बा। उज़्बेकिस्तान के राजधानी ताशकंद से करीब २२८ किलोमीटर पूरब, अन्दिजान से ११५ किलोमीटर पच्छिम अउर फ़रगाना सहर से तकरीबन ८ किलोमीटर दूर पड़त हवे। एकरे के कबहूँ-कबहूँ 'हवा के मिल' या 'जंगली सूअर के बिल' भी कहे जाय हवे। खोकन्द बहुते पुरान अउर व्यापार खातिर नामी सहिर हवे। एहाँ से निकले वाला रस्ता पहाड़ तरफ़ जाय के ताशकंद से जुड़त हवे, अउर दुसरा रस्ता पूरब ओर खुजन्द खातिर जात हवे। फ़रगाना घाटी के आती-जाती राह मा ई एक मुख्य पड़ाव हवे। १९९९ के जनगणना में शहर के आबादी करीब १,९२,५०० दर्ज भइल रहय।[१]
इतिहास
[सम्पादन | स्रोत सम्पादित करैं]ख़ोक़न्द शहर उज़्बेकिस्तान के सबसे पुरान शहरन में से एक हवे अऊर ई फरगाना घाटी के पच्छिमी भाग मा बसल बा। १०वीं सदी के इतिहासिक आलेख मा हवोकन्द (शहर के पुरान नाव) के बारे में पहिली लिखित चर्चा मिलत बा।
१३वीं सदी मा मंगोलन के चढ़ाई दौरान, मध्य एशिया के जइसे जादे सहिरन, ओइसही ख़ोकन्द के भी बहुते नुक़सान भइल रहे। बाद मा ई सहिर रेसम के राह पर सौदा-सुत्ता खातिर एक बहुत महत्तव के ठिकाना बन गय, जवन आजुओ आपन इतिहासिक बनिया-व्यापार खातिर चिन्हाइल जात बा।
कोकन्द कम से कम दसवीं सदी से ‘खवाकन्द’ नांव से जानल जात रहे, आउर दक्षिण एशिया अउर पूरबी एशिया के बीच गुजरै वाली कारवां वाली डगर पर चले वाला राहगीरन के लिखल ब्यौरन मा बहुते बेर ओकर उलेख मिलत रहा। चीन के हान राजवंस पहिली सदी ईसा पूर्व मा ई पूरा इलाका अपने काबू मा कर लिहल रहे, जइसे बाद मा अरब लोग तांग सल्तनत से इ धरती के जीेत लिहिन। मंगोलन तेरहवीं सदी मा ख़ोकन्द के उजाड़ के रख दिहिन।[२]
शिक्षा अऊर संस्कृति
[सम्पादन | स्रोत सम्पादित करैं]कोकन्द सहिर मा कई गो मदरसा मिलत रहैं। कोकन्द इस्लाम धर्म मा आपन ठेकाना योगदान दिहिस। ई बहुत गो नामी हनफ़ी आलिम लोगन के सहिर रहिस, जइसे अब्दुलहाफिज अल-कुकोनी अउर योर्किन्जोन कोरी अल-कुकोनी।
कोकन्द मा कई गो पढ़ाई-लिखाई के ठिकाना बाटें। एमें "ताशकंद राज्य तकनीकी विश्वविद्यालय के कोकन्द शाखा (इस्लोम करीमोव के नांव पर)", "कोकन्द राज्य विश्वविद्यालय" (२०१९ मा बनल), "कोकन्द राज्य सिक्षा संस्थान", ९ गो कॉलेज अउर लाइसेम, ४० गो मध्य विद्यालय, ५ गो सगरी संगीत स्कूल, एक नाटक-मंच (थिएटर) अउर २० गो किताब-घर (पुस्तकालय) सामिल हईं। कोकन्द मा ७ गो इतिहासिक अउर घरेलू किसिम के संग्रहालय भी बसल हईं।
पहिला अंतरराष्ट्रीय हस्त-सिल्प महोत्सव सितम्बर २०१९ मा कोकन्द सहिर मा भइल रहे। ई उज्बेकिस्तान हस्त-सिल्प संघ के तरफ से सजावल गय रहे, जउन मा विश्व शिल्प परिषद के सरदार रोजी ग्रीनलीज मान्य अतिथि रहिन। करीब ७० मुलुकन से ६०० से अधिक रचनईया (हुनरमंद) लोग हिस्सा लिहिन।
ई महोत्सव दूनियाभर के कारीगरन खातिर आपन बनावल सामान देखावे-बिकावे, आपस मा पहिचान–पहिचान बढ़ावे अउर अपन हाथ के हुनर के अउर निखारे खातिर रचाइल रहे। महोत्सव मा हाथ से बनै वाली कारीगरी के बढ़ावा देवे खातिर अलगा से गोष्ठी अउर बैठकौ राखल गइन। जे शिल्पन के दिखावल गय रहे, ऊमा बाजा–गजिन, चित्रकारी, माटी के बरतन, कपड़ा–बुनाई, लोहा–धातु काम अउर लकड़ी के नक्कासी–सामान सब सामिल रहे।
ई तजवीज (योजना) बनावल गई रहे कि ई महोत्सव हर दू बरिस पर होय वाला नेमित (द्विवार्षिक) आयोजन बनाय जाई। एह हिसाब से अगिला समारो २०२१ मा होखे के बात कहाइल रही।