गोदान (उपन्यास)
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| गोदान (उपन्यास) | |
|---|---|
| 200px गोदान उपन्यास | |
| लेखक | मुंशी प्रेमचंद |
| देश | भारत |
| भाषा | हिंदी |
| विषय | साहित्य |
| प्रकाशक | हंस प्रकाशन |
| प्रकाशन तिथि | 1936 |
| पृष्ठ | 328 |
| आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ | 81-7182-249-5 |

गोदान, मुंशी प्रेमचंद का सबते महत्त्वपूर्ण उपन्यास माना जात है। यहिका प्रकाशन सन् 1936 ई. मा ग्रंथ रत्नाकर कार्यालय, बंबई द्वारा कीन गा रहै। ई उपन्यास मा भारतीय ग्राम समाज अउर परिवेस का सजीव चित्रण कीन गा है। गोदान का गँवई जीवन औ खेतिहर संस्कृति का माहाकाव्य माना जात है। ई उपन्यास मा प्रगतिवाद, गाँधीवाद अउर साम्यवाद के विचारन का गंभीर अउर औचित्यपरक समावेस दीख जात है।
उपन्यास के समीक्षा
[सम्पादन | स्रोत सम्पादित करैं]गोदान उपन्यास मा प्रेमचंद के कला अपने चरम पर पहुंची है। गोदान मा किसानन का सम्पूर्ण जीवन, वहिके आकांक्षा औ निरासा, धर्म भीरुता औ भारतपारायणता, स्वार्थपरता औ बैठक बाजी, वहिकी बेबसी औ निरीहता का खरा चित्र खींचा गा है।
पात्र
[सम्पादन | स्रोत सम्पादित करैं]- होरी-नायक।
- धनिया-नायिका ।
- गोबर-होरी का पुत्र
- झूनिया -गोबर की पत्नी।
- रायसाहब -जमींदार।
- मेहता-दर्शन शास्त्र के प्रफेसर।
- मालती -आधुनिक नारी व डॉक्टर।
- भोला-झुनिया के पिता।
- सोना और रूपा - होरी के पुत्री।
- खन्ना -मिल मालिक ।
- गोविंदी - खन्ना के पत्नी ।
- हीरा-होरी के भाई।
- सिलिया - दलित चमार स्त्री।
- मातादीन और दतादीन- ब्राह्मण।
- ओंकारनाथ -संपादक।
- दुलारी सहुआइन - दुकान की मालकिन।
- सोभा-होरी के भाई।
- अन्य पात्र - झिंगुरी सिंह, पटेश्वरीलाल, नोहरी, पुनिया, मिर्जा खुसेद।