चक
| चक Chak چک | |
|---|---|
| गाँव | |
| चक | |
जामा मस्जिद चक दक्षिण साइट से खींचे हुए फोटो का दृश्य | |
| निर्देशांक: 27°28′45.4908″N 81°28′37.4376″E / 27.479303000°N 81.477066000°E | |
| देश | |
| राज्य | 25px उत्तर प्रदेश |
| जिला | |
| ब्लाॅक | तजवापुर |
| ग्राम पंचायत | रामगढ़ी |
| डाकघर | मैला सरैयां |
| संस्थापक | चंदा अंसारी |
| शासन | |
| • प्रणाली | लोकतांत्रिक |
| • ग्राम प्रधान | श्रीमती बानों पत्नी (मुनीर अहमद अंसारी) (निर्दलीय) |
| • सांसद MP | सावित्री बाई फूले |
| • विधायक MLA | सुरेश्वर सिंह |
| • समाजिक कार्यकर्ता | मौलाना मुहम्मद सईद साहब क़ासमी |
| • समाजिक कार्यकर्ता | शेहरे आलम अंसारी |
| जनसंख्या | ८३२ |
| भाषा | |
| • अधिकारिक | हिंदी |
| • बोलचाल की भाषा | हिंदी उर्दू अवधी |
| • लिखने पढ़ने की भाषा | हिंदी उर्दू अंग्रेज़ी और अरबी |
| चक गाँव के कुछ मशहूर लोग | |
| • अंसारी | मुबीन अहमद, शेहरे आलम, मास्टर अबू शहमा, वजहुल कमर, कक्कू अंसारी, सलीम अहमद, मौलाना रियाज अहमद क़ासमी, हाफिज वहीदुद्दीन (बब्बन हाफीजी), हाफिज मोहम्मद जबिर, गौस मोहम्मद, मुस्ताक अली, बरकत अली, मोहम्मद अकरम, मास्टर शमसूल हक़, मास्टर मोहम्मद हलीम, अत्ताउल्लाह, सुलेमान अंसारी, मोइनुद्दीन अंसारी, मौलवी नूर मोहम्मद, हाफिज ओबैदुर रहमान, हाफिज मुतिउल्लाह,नूरुल्लाह। |
| • राईनी | शमशेर अहमद, महबूब अहमद, मोहम्मद हनीफ, हाफिज नूर अली, मोहम्मद इमरान, मोहम्मद आजम। |
| समय मण्डल | भारतीय मानक समय (यूटीसी+5:30) |
| पिनकोड | 271902 |
| टेलिफ़ोन कोड | 05255 |
| गाड़ियां | यूपी-40 |
चक (अंग्रेजी:Chak) (उर्दू: چک) भारत के राज्य उत्तर प्रदेश के जिला बहराइच मां एक ठो गांव है। यू गांव रामगढ़ी ग्राम पंचायत और थाना बौंडी, अउर बिलाक तजवापुर, के अंतर्गत आवत है। ईं गांव से जिला का मुख्यालय बहराइच शहर उत्तरय 21 किलोमीटर है, अउर हियां से उत्तर प्रदेश केर राजधानी लखनऊ 80 किलोमीटर है। चक गांव के बगल मां उत्तरय दुइ किलोमीटर एक ठो बाजार है जीका लोग खैरा बाजार के नाम से जानत हैं। अउर इके पुरबै 9 किलोमीटर फखरपुर बाजार है, अउर इके दखिनय 6 किलोमीटर जैतापुर बाजार है, पच्छुवैंय लंग डेढ़ किलोमीटर मैला ताल है, अउर पच्छूवैंय अउर दखिनय कोने पर 9 किलोमीटर दूर बौंडी कस्बा है। जो ईं गांव के थाना है।
चक गाँव एक देहाती इलाका है। हियां के लोग किसान हैं जो मुख्य रूप से खेती-बाड़ी करत हैं। धान, गेहूँ, गन्ना और सरसों की पैदावार हियां खूब होत है।
गांव के नाम चक कैसे पड़ा
[सम्पादन | स्रोत सम्पादित करैं]चक नाम अवधी भाषा से आया है। उत्तर प्रदेश में खेतन को चक कहत हैं। कुछ पुरनिया लोगन से सुना गवा है कि जहाँ आज चक गाँव है, उहाँ पहिले घना जंगल रहा। उसी जंगल के पासे कुछ मुसलमान रहत रहे, जइसे भागू अंसारी अउर उनकर बेटा सलाबत अंसारी, अउर एक ठाकुर साहब। लेकिन उस गाँव का कोऊ नाम ना रहा। जब चंदा अंसारी अउर उनकर भाई करिया अंसारी उस गाँव में आए, तौ वो लोग लखनऊ जिला के काकोरी गाँव से आए रहे। तब ठाकुर साहब कहने कि चंदा भाई, अपन घर इस चक में बनाओ। चंदा अंसारी उसी चक में अपन घर बनाए। तभी से उस गाँव का नाम चक पड़ गवा।
इतिहास
[सम्पादन | स्रोत सम्पादित करैं]तब गाँव के कुछ लोगन ने अपन व्यापार शुरू किहिन, कुछ लोग गाँव छोड़ के शहर कमाई खातिर चले गये, अउर कुछ घर पे खेती-मजूरी करे लगे। हबीबुर्रहमान अंसारी लकड़ी के ठेकेदारी का काम शुरू किहिन। उस समय ऊ बहुते पैसा कमइन। 1980 से 90 के दशक में चक गाँव के लोग, पैसा ज्यादा होवे के कारण, हबीबुर्रहमान अंसारी को महाजन कह के बुलावत रहे, मतलब जौन मालदार हो। फिर धीरे-धीरे कुछ लोग लखनऊ, कानपुर, दिल्ली, मुम्बई, कोलकाता, अउर हैदराबाद चले गये। उहाँ ऊ लोगन बहुते अच्छा कमाई किहिन, अउर कुछ लोगन त अपन घर बना के उहाँ के हो गये।