चैत्र नवरात्री
| चैत्र नवरात्री | |
|---|---|
पूजा के भव्य पंडाल | |
| अनुयायी | हिन्दू, भारतीय, भारतीय प्रवासी |
| प्रकार | Hindu |
| आरम्भ | चैत्र माह, माघ माह, आषाढ़ माह और आश्विन माह |
| तिथि | प्रतिपदा से नवमी तिथि तक |
चैत्र नवरात्रि, जेका वसंत नवरात्रि भी कहा जात है, दूसरी सबसे प्रसिद्ध नवरात्रि है, जेकर नाम वसंत के बाद रखा गवा है जेकर अर्थ है वसंत। ई चैत्र (मार्च-अप्रैल) चंद्रमा कै महीना मा मनावा जात है। ई त्यौहार देवी दुर्गा खातिर समर्पित ह, जेकर नौ दिन पर नौ रूप के पूजा होत है। अंतिम दिन भी रामनवमी, राम का जनमदिन है। एही कारन कुछ लोग एकरा के राम नवरात्रि भी कहेला।
कई क्षेत्रन मा, ई त्यौहार बसंत फसल के बाद मनावा जात है, अउर दूसरन मा, ई त्यौहार फसल के बखत मनावा जात है। विक्रम संवत कैलेंडर के हिसाब से ई हिन्दू चंद्र-सूर्य कैलेंडर कय पहिला दिन होय, जेका हिन्दू चंद्र नव वर्ष के रूप मा भी जाना जात है।
चैत्र नवरात्रि का कश्मीरी पंडित, महाराष्ट्र मा गुडी पाडवा अउर आंध्र प्रदेश, तेलंगाना अउर कर्नाटक मा उगादी द्वारा नवरह कहा जात है।
सन् २०२५ मा ई दिन रविवार, ३० मार्च,-सोमवार, ७ अप्रिल का दिन मा मनावा जई।[१] नवरात्रि के हर दिन देवी दुर्गा के एक अलग रूप का समर्पित कीन जात है, जेकर नाम है: शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चन्द्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी अऊर सिद्धिदात्री, अऊर हर रूप एक अनूठा गुण का प्रतिनिधित्व करत है। यहि दिन छोट-छोट बिटियन का देवी दुर्गा के रूप मा पूजा कीन जात है अउर खाना खिलावा जात है। माना जात है कि अइसा करै से घर मा सुख-समृद्धि बनी रहत है और देवी दुर्गा का आशीर्वाद मिलत है।
नवरात्रि व्रत कथा
[सम्पादन | स्रोत सम्पादित करैं]पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, एक समय मा महिषासुर नामक राक्षस का आतंक धरती पर काफी बढ़ ग रहा था। महिषासुर क वरदान रहा कि ओका कउनो देव या दानव नाहीं मारत। ई वरदान पावे के बाद महिषासुर हर जगह आपन आतंक फैला दिहिस। ई राक्षस स्वर्ग तक आपन अधिकार जमा लेले रहा। जिसके बाद सभी देवता अपनी रक्षा खातिर भगवान भोलेनाथ की शरण मा पहुँचे। तब देवी पार्वती आपन अंश से नौ रूप प्रकट कईली, जेके सभी देवताओं ने अपने-अपने शस्त्र देकर शक्ति संपन्न कईली। ऐसी मान्यता है कि ये पूरी प्रक्रिया चैत्र माह के प्रतिपदा तिथि से प्रारम्भ होकर पूरे ९ दिन तक चली। मान्यताओं के अनुसार तब से ही चैत्र महीने मा नवरात्रि पर्व मनाने की परंपरा प्रारम्भ होरही है। कहा जात है कि नवरात्रि के नौवें दिन मां दुर्गा उस राक्षस का अंत कर दिहिन रहिन। चैत्र नवरात्रि के नौवें दिन राम नवमी भी मनाई जात है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार एही दिन प्रभु श्रीराम का जन्म भइल रहे। एही से चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि के दिन रामनवमी का पर्व मनावा जात है। ऐसी भी मान्यता है कि भगवान राम रावण का वध करे से पहिले मां दुर्गा की उपासना की रहिन।
सन्दर्भ
[सम्पादन | स्रोत सम्पादित करैं]- ↑ "Chaitra Navratri 2025: चैत्र नवरात्र कल से शुरू, सुबह इतने बजे शुरू हो जाएगा घटस्थापना का शुभ मुहूर्त". आज तक (हिन्दी भाषा में). २९ मार्च २०२५. ई ३० मार्च २०२५ को पुनः प्राप्त कीन गा .
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