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ट्टेओकबोक्की

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ट्टेओकबोक्की (कोरियाई भाषा मँ जेका 떡볶이 कहे जात अहइ) कोरिया क एक बहुते मशहूर पकवान अहइ। इ पकवान खास तौर से सड़क किनारे बिके वाला नाश्ता मँ गिनल जात अहइ। चावल से बने लम्बा-लम्बा केक, जेका ट्टेओक कहे जात अहइ, ओहका तीखा या बिना तीखा सॉस मँ पका के ट्टेओकबोक्की बनावल जात अहइ।

कोरिया मँ ट्टेओकबोक्की हर उमर के लोगन क पसंद अहइ। स्कूल जाए वाला बच्चा से लइके बूढ़ लोग तक, सबइ लोग इ पकवान खाय पसंद करत अहैं। खासकर ठंडा मौसम मँ गरम-गरम ट्टेओकबोक्की बहुते चाव से खाइल जात अहइ।[]

“ट्टेओक” के मतलब अहइ चावल से बना केक अउर “बोक्की” के मतलब अहइ भूना या हल्का-हल्का उबाला हुआ। मतलब इ पकवान चावल के केक के सॉस मँ भूना के बनावल जात अहइ। समय के साथ नाम के अलग-अलग लिखावट भी चलन मँ आइन, जइसे टोपोक्की, डुकबोक्की अउर ट्टेओबोक्की।

ट्टेओकबोक्की मँ मुख्य रूप से चावल के केक इस्तेमाल होवत अहैं। इ केक लंबा, सफेद अउर नरम होत अहैं। संग मँ मछरी से बने केक, उबला अंडा, हरा प्याज, गोभी अउर कभी-कभी गोमांस या समुद्री खाना भी डाला जात अहइ। तीखा स्वाद खातिर लाल मिर्च वाला पेस्ट इस्तेमाल होवत अहइ, जेका गोचुजांग कहे जात अहइ।[]

ट्टेओकबोक्की क इतिहास बहुत पुरान अहइ। उन्नीसवीं सदी के एक कोरियाई रसोई किताब मँ इ पकवान के जिक्र मिलत अहइ। ओ जमाना मँ इ पकवान तीखा नाहीं होत रहा, बल्कि सोया सॉस मँ बनावल जात रहा। ओह समय इ पकवान राजमहल अउर अमीर घरन मँ खाइल जात रहा।

बीसवीं सदी के बीच मँ जब कोरिया मँ लाल मिर्च के इस्तेमाल बढ़ा, तब ट्टेओकबोक्की भी तीखा बन गवा। सन 1953 मँ सियोल शहर के सिंदांग इलाका मँ माबोक-रिम नाम की औरत गलती से चावल के केक के मिर्च वाला सॉस मँ डाल दिहिन। स्वाद बहुते नीक लागा अउर ओहइ से आज वाला तीखा ट्टेओकबोक्की सुरू भवा।[]

सामाजिक अउर सांस्कृतिक महत्त्व

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ट्टेओकबोक्की खाली खाना नाहीं, बल्कि कोरियाई समाज क हिस्सा अहइ। दोस्तन के संग सड़क किनारे खड़ा होके ट्टेओकबोक्की खाना, कोरिया मँ आम बात अहइ। स्कूल से लौटत बच्चा, दफ्तर से निकरत मजदूर, सबइ लोग इ पकवान खात देखे जात अहैं।

कोरियाई टीवी सीरियल, फिलिम अउर किताबन मँ भी ट्टेओकबोक्की के जिक्र मिलत अहइ। एक मशहूर किताब “मरना चाहत हउँ, लेकिन ट्टेओकबोक्की खाना चाहत हउँ” के अंग्रेजी अनुवाद के बाद इ पकवान दुनिया भर मँ अउर जियादा पहचान बनाइस।[]

ट्टेओकबोक्की क कई किसिम अहैं:

  • गुंगमुल ट्टेओकबोक्की – रसदार अउर तीखा, सबसे जियादा आम
  • गिरेउम ट्टेओकबोक्की – तेल मँ भूना हुआ, बिना रस
  • गुंगजुंग ट्टेओकबोक्की – बिना मिर्च, सोया सॉस वाला
  • राबोक्की – नूडल्स वाला ट्टेओकबोक्की
  • करी ट्टेओकबोक्की – करी स्वाद वाला
  • क्रीम ट्टेओकबोक्की – मलाईदार, पाश्चात्य स्वाद
  • चीज ट्टेओकबोक्की – ऊपर से चीज डलल

आज ट्टेओकबोक्की कोरिया से बाहर भी मशहूर होइ चुका अहइ। अमेरिका, यूरोप, जापान, भारत आउर दक्षिण-पूर्व एशिया मँ कोरियाई रेस्टोरेंट मँ इ पकवान मिल जात अहइ। कोरियाई खाना के बढ़त लोकप्रियता के संग ट्टेओकबोक्की भी दुनिया भर मँ पहिचान बनाइस।[]

सन 2024 मँ उत्तर कोरिया मँ दक्षिण कोरिया से जुड़े कुछ पकवानन पर रोक लगाइ गइ, जेमे ट्टेओकबोक्की भी शामिल रहा।[]

ट्टेओकबोक्की कोरिया क एक ऐसा पकवान अहइ जे इतिहास, संस्कृति अउर रोजमर्रा के जिनगी से जुड़ा अहइ। सरल सामग्री से बनल इ पकवान आज अंतरराष्ट्रीय पहचान बना चुका अहइ।

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  2. "Standard Korean Food Ingredients". National Institute of Korean Language. २०१४. {{cite web}}: Missing or empty |url= (मदद)CS1 maint: date auto-translated (कड़ी)
  3. "History of Tteokbokki". Hansik Portal. {{cite web}}: Missing or empty |url= (मदद)
  4. "Korean Food in Global Culture". The Guardian. २०२२.{{cite news}}: CS1 maint: date auto-translated (कड़ी)
  5. "Global Expansion of Korean Street Food". BBC.
  6. "North Korea bans South Korean dishes". Radio Free Asia. २०२४. {{cite web}}: Missing or empty |url= (मदद)CS1 maint: date auto-translated (कड़ी)