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दूनहुआंग

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दूनहुआंग (चीनी: 敦煌, अंग्रेज़ी: Dunhuang) चीन के गांसू प्रांत में बसल एक सहिर हवे जे पुरनका रेशम–मार्ग पर एगो महत्त्वपूर्ण पड़ाव रहे। सन २००० की जनगणना के हिसाब से इहाँ के आबादी करीब १,८७,५७८ रहे। रेत के टिब्बन से घेरल एह रेगिस्तानी इलाका में दूनहुआंग एक नख़लिस्तान हवे, जौने में ‘नवचंद्र झील’ (अर्धचंद्राकार झील) खास देखे लायक जगह हवे। पुरातन समय में एहके ‘शाझोउ’ (沙州), यानी ‘रेत वाला नगर’ नाम से भी जानल जात रहल। एही जगह पर मोगाओ गुफा–समूह स्थित बा, जहाँ बौद्ध धर्म से जुड़ल करीब ४९२ गुफा–मंदिर बन्ने बाड़ें, जेमे पुरान चित्रकारी अउर मूर्ति–कला में भारत से गहिरा सांस्कृतिक नाता साफ दिखत बा।

Mondsichelsee-03

दूनहुआंग रेशम–मार्ग पर बसल हवे, जवन रस्ता भारत अउर तिब्बत की राजधानी ल्हासा से होके मंगोलिया अउर आगे साइबेरिया तक जात रहे। ई वही ‘हेह शी’ गलियारा के मुहाने पर पड़ेला, जेकर ज़रिये मध्य एशिया अउर बाकी एशिया के बीच व्यापार अउर सैनिक आवा–जाही होखत रहे। इहाँ से पहिले पूरब की ओर सीधा प्राचीन राजधानी चांगआन अउर लुओयांग तक राज–मार्ग जात रहे।

दूनहुआंग के चारों ओर के रेतीला पहाड़न से हवा चले पर रेत उड़–उड़ के अजब आवाज़ पैदा करे, एही से ओनकर नाँव ‘गाती रेत के पहाड़’ पड़ गइल, जे चीनियाँ में ‘मिंगशा शान’ (鸣沙山) कहल जात हवे। है।[]

White Horse Temple, Dunhuang

दूनहुआंग इलाका में मनुसन के बसावट करीब २०,००० साल पुरान मानल जात हवे। ‘हानशु’ जइसन पुरान चीनी ग्रंथन में ई इलाका युएझ़ी जाति के बसोवा के रूप में लिखल मिलेला।

तीसरी सदी ईसा पूर्व में एह दिगवा पर श्योंगनु क़बीलन के दबदबा हो गइल रहे। रेत अउर माटी से बनल मीनार–नुमा चौकी (वॉचटॉवर) खड़ा कइल गइल रहस, जहंवा से श्योंगनु के हमला देखे–रोकले खातिर पहरा दिहल जात रहे। दुश्मन घुस पड़े पर एही मीनारन पर आग–कुंड जलाई के दूर तलक इशारा भेजल जात रहे, एसे कुछ विद्वान लोग मानेला कि ‘दूनहुआंग’ नाँव के मतलब ‘जलती मशालन के रोशनी’ या ‘जगमगावन’ जइसन भाव से जुड़ल हो सकत बा।[]

दूनहुआंग से होते कारवाँ–राह मा व्यापारी लोग, बौद्ध भिक्षु अउर प्रवचन देवे वाला साधु–सन्यासी लगातार आवत–जावत रहिन, एही से ई जगह धीर–धीरे बौद्ध धर्म के बड़ा केन्द्र बन गइल। ईसवी तीसरी–चौथी सदी के आसपास बौद्ध भिक्षुन अउर दान–दाता लोग मिलके मोगाओ गुफा–मंदिर तराशे शुरू कइलन; परम्परा में ३६६ ईस्वी से गुफन के खुदाई के आरम्भ मानल जाला।

सीमावर्ती इलाका होखे के कारण दूनहुआंग पर कई बेर गैर–चीनी ताकतन के क़ब्ज़ा होत–छुटत रहल – हान राजवंश के कमज़ोर पड़ला पर एह इलाका पर फिर से श्योंगनु, बाद में तुर्क, तिब्बती अउर स्थानीय राजवंश बारी–बारी से हावी भइलन। सोंग अउर बाद के जमाना में रेशम–मार्ग के अहमियत कम होखे लागल त दूनहुआंग भी धीरे–धीरे किनारा हो गय, हालाँकि यूआन (मंगोल) अउर चिंग (किंग) राजवंश के समय फिर से चीनी काबू में आवत रहल।

दूनहुआंग चारो ओर से ऊँच–ऊँच पहाड़न से घेरल बा, एसे इहाँ सर्दी अउर गरमी दुन्नो मौसम साफ महसूस होखेलन। जुलाई महीना में दिन के सबले ज़्यादा तापमान करीब ३३ डिग्री सेल्सियस ले जा सकेला, जबकि जाड़ा में पारा घट के लगभग −१४.६ डिग्री सेल्सियस तक नीचे गिर सकेला। इलाका मरुभूमि वाला हवे, बरखा बहुते कम पड़ेला, अउर जेहुनी थोड़ बहुत पानी गिरे, ऊ जल्दी सूखके रेत में समा जात बा।[]