नीली लोमड़ी
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नीली लोमड़ी एक परी कथा है जवन पूरे भारतीय उपमहाद्वीप मा जानी जात है।
पौराणिक स्रोत
[सम्पादन | स्रोत सम्पादित करैं]नीली लोमड़ी के परी कथा सबसे पहिले पंचतंत्र मा दिखाई देत है।
कहानी
[सम्पादन | स्रोत सम्पादित करैं]मौखिक संचरण के माध्यम से जानी जाय वाली नीली लोमड़ी के कहानी भारत के एक हिस्सा से दूसर हिस्सा मा बहुत भिन्न नाहीं होत है। यद्यपि जानवर का चंद्रू, नीलकंठ या नीला गिधर (शाब्दिक अर्थ नीला लोमड़ी) के रूप मा विभिन्न रूप से जाना जात है।
सबसे आम संस्करण मा[१] यहि प्रकार:
| नीली लोमड़ी का कथा (पंचतंत्र का एक परी कथा) |
|---|
| एक दिन साँझ अंधेरा होय के बाद एक भूखी लोमड़ी भोजन के तलाश मा जंगल मा अपने घर के पास एक बड़े गाँव चली गै। स्थानीय कुत्ते लोमड़ी का पसंद नाहीं करत हैं अऊर ओनका पीछा करत हैं ताकि उ एक जानवर का मार के अपने मालिकन का गर्व कर सकै। लोमड़ी जतना तेजी से दौड़ सकत रहा, ई नाहीं देखत रहा कि ऊ कहाँ जात है, अऊर कपड़ा रंगै वाले मनई के घर के बाहर एक नीली बाल्टी मा गिर गा। कुत्ता आगे भागिन अऊर लोमड़ी बाल्टी से भीगी लेकिन सुरक्षित बाहर आई। लोमड़ी जंगल मा घूमत रही अऊर जंगल के राजा शेर का देखिस। शेर ओसे पूछिस कि तुम कौन हौ औ लोमड़ी ई देखि के कि अब ऊ नील होइगा है, अपने आप का चंद्रू जंगल के सब जानवरन के रक्षक घोषित कइ दिहिस। "चंद्रू" शेर से कहिन कि हम जंगल के रक्षा तब करब जब सब जानवरन का भोजन अऊर आश्रय दीन जाई।
देखत-देखत चंद्रू जंगल के दूसर जानवरन से सलाह माँगिन तौ जानवर उनके गोड़न मा बइठि के उनके लिए सबसे नीक खाना लइ आए। लेकिन एक पूर्णिमा के रात कुछ लोमड़ी भौंकत रहीं। चंद्रू न सुनिस न देखिस तौ वै भी चिल्लाय परे।[१][२][३][४] |
संदर्भ
[सम्पादन | स्रोत सम्पादित करैं]- 1 2 "Panchatantra The Story of The Blue Jackal". मूल से से २०१०-०८-१४ के पुरालेखित. ई २०२५-०३-१० को पुनः प्राप्त कीन गा .
{{cite web}}: CS1 maint: date auto-translated (कड़ी) - ↑ The Blue Jackal : A Panchtantra Story by Swapna Dutta
- ↑ A - Z Hinduism - Panchatantra Stories
- ↑ "The Blue Jackal". Tell-A-Tale. २५ जुलाई २०१५. ई २६ अप्रैल २०१६ को पुनः प्राप्त कीन गा .
{{cite web}}: CS1 maint: date auto-translated (कड़ी)