पेत्रा
पेत्रा [१](अरबी: अल-बत्रा, यूनानी: पेत्रा) जॉर्डन के मआन सूबे मा बसल एक इतिहासिक सहिर हवे, जवन पत्थर तरास के बनावल इमारतन अउर पानी ले चले के जुगर (नाला–नाली, नहर प्रणाली) खातिर परसिद्ध बाटे। छठवीं सदी ईसापूर्व मा नबाती लोग एहिके आपन राजधनी बना के बसवले रहिन, बाकिर मानल जात ह कि एकरा के बनावे–सँवारै के कार्य बारह सौ बरिस ईसा पूर्वे से चलत रहे। आज के जमाना मा पेत्रा बहुते नामी सैर–सपाटा के ठीकाना हवे, जे “होर” नांव के पहाड़ी के ढलान पर बनल बा अउर चारु ओर से पहाड़ घेरले हवे। ई पहाड़ी मरेला सागर से लइके अकाबा के खाड़ी तक खिंचैले “वादी अरबा” घाटी के पूर्वी किनारा बनावत हवे। पेत्रा के युनेस्को विश्वभर के धरोहरन में गिनले बावे, अउर बीवीसी आपन “मरे से पहिले देखे लायक ४० जगह” वाली सूची मा भी एह सहिर के सामिल कइले बा।
इतिहास
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पेत्रा जॉर्डन के दक्षिणी भाग मा बसल एगो बहुते पुरनका सहिर हवे, जेकर इतिहास हजारन बरिस पाछे ले जात हवे। इहाँ के इलाका लगभग ७००० ईसा पूर्व से बसाइल मिलत ह, बाकिर असल पेत्रा के नाम तब चमकल जब अरब घुमन्तू क़बीला नबाती लोग चौथी–दूसरी सदी ईसा पूर्व के बीच इहाँ डेरा जमइके आपन राज बसवलन।[२]
पहिली–दूसरी सदी ईसा पूर्व तक पेत्रा नबाती बादशाही के राजधानी बन गय अउर राल, गंधरस, मवर्षा जइसन सौदा–सुत्ता वाला डगर पर एगो बड़ा बनिया–केन्द्र बन गय। पहाड़ काट–काट के बनावल मकान, मंदिर, कब्र अउर नहर–नाला के जुगर देख के बुझाला कि नबाती लोग पानी सँभारे अउर इंजीनियरी मा बहुते आगे रहलें।

१०६ ईस्वी मा रोमन बादशाह त्राजन नबाती राज्य के अपने साथ मिला लिहिस, अउर पेत्रा रोमन सूबे ‘अरेबिया’ के भाग बन गय, बाकिर कुछ सदी ले व्यापार के केन्द्र रहे के कारण ई सहिर तरक्की करत रहल। धीरे–धीरे सौदा–सुत्ता के राह ऊपर–उत्तर अउर समुन्दर के रस्ता तरफ खिसक गइन, फेर ३६३ ईस्वी के भारी भूकंप से बहुते इमारत ढह गइयन, जेसे पेत्रा के रोब–दाब अउर बचे–खुचे कमाई दुन्नो पर चोट पड़ल।
बाद के सदीयन मा ईसाई जमाना आवत–आवत पेत्रा मा गिरजाघर बनल, कुछ पुरनका कब्र–मकबरा के भी गिरजा बनवाइल गय, फेर सातवीं सदी के इस्लामी फतह अउर १२वीं सदी तक के सलीबी (क्रूसेडर) क़िला बनल–उजड़ल के बाद ई सहिर लगभग सुनसान पड़त गय। आठवीं सदी के आस–पास त पेत्रा लग–भग खाली हो गय अउर बरसों ले बाहरी विश्वँ खातिर गायब जइसन रहिस, जब तक कि १८१२ मा स्विस यात्री योहान लुडविग बुर्खार्ट फेर से पच्छिमी विश्व के इहाँ के राह नइका से न बता दिहलन।[३]
२०वीं सदी मा पुरातत्त्वविद लोगन के स्वयंाई से पेत्रा के असली ठाट–बाट धीरे–धीरे समने आवे लगल, अउर १९८५ मा युनेस्को एकरा के ‘विश्व के धरोहर’ मान लिहलस। २००७ मा पेत्रा विश्वके ‘नयका सात अचरज’ मा गिनाइल, अब ई जगह आपन गुलाबी–लाल पत्थर वाला सहिर, सँकोची दर्रा (सिक), अउर तरासल मुखौटा–इमारतन खातिर विश्व भर के मुसाफिर लोग के खींचत हवे। [४]