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बैसाखी

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बैसाखी
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बैसाखी कय उत्सव
आधिकारिक नाँव बैसाखी
दुसर नाँव वैसाखी
मनावय वाले सिख, हिन्दू, भारतीय
किसिम धार्मिक, सामाजिक
उद्देश्य फसल कटाई कय खुशी, धार्मिक उत्सव
सुरुवात प्राचीन काल से
तिथि वैशाख महीना कय पहिला दिन (१३ या १४ अप्रैल)
२०२६ तिथि १४ अप्रैल
रिवाज गुरुद्वारा मा अरदास, कीर्तन, स्नान
उत्सव मेला, भांगड़ा-गिद्धा नृत्य, खुशी मनावना
वईसय दुसर त्युहार पुथंडु, पोहेला बोइशाख, विशु

बैसाखी (जेकरे का वैसाखी भी कहत हउ) एक महत्त्वपूर्ण त्योहार अहै, जौ हर वर्ष १३ या १४ अप्रैल का मनावल जात हवे[]। ई त्योहार खास तौर पर पंजाब अउर उत्तर भारत मा मनावल जात अहै।

बैसाखी कई तरह से महत्त्वपूर्ण अहै, ई एक फसल कटाई (कटनी) का त्यौहार हवे, जौ किसान लोग रबी फसल के तैयार होइ जाए पर मनावत हउ। कई इलाका मा ई नव वर्ष (नया साल) का शुरुआत भी मानल जात अहै।

बैसाखी के दिन लोग कई तरह से त्यौहार मनावत हउ:

  • गुरुद्वारा मा जा के पूजा-पाठ अउर कीर्तन करत हउ
  • नगर कीर्तन अउर जुलूस निकाले जात हउ
  • मेला अउर सांस्कृतिक कार्यक्रम होवत हउ
  • लोग आपस मा मिलत-जुलत अउर खुशी मनावत हउ
  • किसान भगवान का धन्यवाद देत हउ अच्छी फसल खातिर
  • इतिहास

बैसाखी पहिले से एक खेती-बाड़ी से जुड़ल त्योहार रहा, लेकिन सिखों के १०वें गुरु गोबिंद सिंह जी, १३ अप्रैल १६९९ का बैसाखी का आनंदपुर साहिब मा खालसा पंथ के स्थापना किहिन[]। ई ऐतिहासिक घटना अत्याचार के खिलाफ एक निडर, सामानता आधारित समाज बनावै के लिए कीन गै रही। गुरु जी पाँच प्रियजनन का सिंह (पुरुष) अऊर कौर (मेहरारू) नाम से आआशीर्वाद दिहिन, जवन साहस अऊर सामानता के प्रतीक बन गए, तब से ई सिखन खातिर बहुत बड़ा धार्मिक त्योहार बन गवा।।

  1. बरसले, जागृति सोनी (२ अप्रैल २०२६). "बैसाखी इस साल 13 या 14 अप्रैल कब ? क्यों मनाते हैं ये त्योहार, जानें महत्व". ABP News (हिन्दी भाषा में). ई ३ अप्रैल २०२६ को पुनः प्राप्त कीन गा .{{cite web}}: CS1 maint: date auto-translated (कड़ी)
  2. Nangia, Tamanna (२० जुलाई १९९८). "Tenth Sikh Guru, Adi Granth, Dasam Granth, Khalsa, Chaar Sahibzaade, & Death". Encyclopedia Britannica. ई ३ अप्रैल २०२६ को पुनः प्राप्त कीन गा .{{cite web}}: CS1 maint: date auto-translated (कड़ी)