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ममता चंद्रकार

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राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी श्रीमती को पद्म श्री पुरस्कार प्रदान करते हुए। नई दिल्ली में राष्ट्रपति भवन में एक नागरिक अलंकरण समारोह में ममता चंद्राकर

ममता चंद्राकर (जन्म 3 दिसम्बर 1958) छत्तीसगढ़ के पद्मश्री से सम्मानित लोकगायिका हैं। उनका छत्तीसगढ़ के कोयल के रूप मा जाना जात है। ममता चंद्राकर ने इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय से गायन मा स्नातकोत्तर डिग्री प्राप्त कीन है।[१] ममता चन्द्राकर 10 साल के उमर से गावै लाग हैं अउर प्रोफेशनल रूप से 1977 मा आकाशवाणी केन्द्र रायपुर के साथै लोकगायिका के रूप मा लिहिन हैं। उ अपने काम के लिए 2016 मा पद्मश्री पुरस्कार विजेता हैं, उ कई अन्य राज्य स्तरीय पुरस्कार जीत चुकी हैं। उनकर पति प्रेम चंद्राकर छॉलीवुड मा एक निर्माता अऊर निर्देशक हैं।[२]

ममता चन्द्राकर जी का जनम सन् 1958 में श्री दाऊ महासिंह चन्द्राकर जी के घरे भवा रहा जेके स्वयं लोक संगीत के गहरा ज्ञान रहा।[३] उ समय जब बॉलीवुड संगीत स्थानीय लोक संगीत का प्रभावित करत रहा, उ 1974 में "सोनहा-बिहान" नाम के कम्पनी शुरू किहिन।सोनहा-बिहान का उद्देश्य लोगन के दिल अऊर दिमाग मा लोक संगीत के आत्मा का जिंदा रखब रहा। यहि विचार से सोनहा-बिहान मार्च 1974 मा चालीस से पचास हजार लोगन के सामने आपन प्रस्तुति दिहिन। स्वर्गीय दाऊ महासिंह आपन पूरा जीवन लोक संगीत का बढ़ावा देय मा समर्पित किहिन। ममता चंद्राकर ने अपने शुरुआती पाठ अपने पिता से खुद लिहिन। यहिके बाद संगीत मा आगे के पढ़ाई खातिर इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय मा दाखिला लिहिन। १९८६ मा छत्तीसगढ़ी सिनेमा के निर्देशक अउर निर्माता प्रेम चंद्राकर से शादी भै। दंपति के 1988 मा एक बिटिया भै रही।[४]

ममता चंद्राकर हुनका व्यावसायिक करियर १९७७ में आकाशवाणी केंद्र रायपुर से शुरू करलें अउर हुनका ३६ साल से ज्यादा समय तक सहायक निदेशक (कार्यक्रम) के रूप में सेवा दिहलें। हुनका "सोन्हा-बिहान" कंपनी के साथ १९७४ में ही बड़े मंच पर ४०-५० हजार लोगन के सामने प्रदर्शन कर चुका हईं। हुनका छत्तीसगढ़ी लोक गीतन के अलावा प्लेबैक सिंगिंग भी करलें। हुनकर पिता के प्रभाव में हुनका लोक संगीत के संरक्षण खातिर लगल रहलें। हुनका इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय के कुलपति के पद पर भी सेवा दिहलें।[५] हुनका गायन के दौरान हुनकर सुरीली अउर मधुर आवाज खातिर हुनका "स्वर कोकिला" कहल जाला।[१]

  • 2023 संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार[६]
  • 2019 छत्तीसगढ़ विभूति अलंकरण
  • 2016 का पद्मश्री पुरस्कार
  • २०१३ छत्तीसगढ़ रत्न
  • 2012 दाऊ दुलार सिंह मन्द्राजी का सम्मान