माता टेरेसा
| कलकत्ता की टेरेसा | |
|---|---|
| [[File: माता टेरेसा, सन् 1995 मा | |
| जनम | 26 अगस्त 1910 उस्कुप, कोसोवो विलायत, उस्मानी साम्राज्य |
| मौत | 5 सितंबर 1997 कलकत्ता, पच्छिम बंगाल, भारत |
माता टेरेसा (जनम नाव: अंजेज़े गोंझे बोयाझियु; 26 अगस्त 1910,5 सितंबर 1997), जिन्हका संत माता टेरेसा भी कहा जात हय, ऊ एक अल्बानियाई-भारतीय कैथोलिक ननैया रहीं, मिशनरीज़ ऑफ चैरिटी की संस्थापिका रहीं, अउर कैथोलिक संत रहीं।
ऊ स्कोप्ये मा जनमी रहीं, जौन तब उस्मानी साम्राज्य का हिस्सा रहा। 4 सितंबर 2016 का कैथोलिक चर्च द्वारा उन्हका कलकत्ता की संत टेरेसा नाव से संत घोषित कीन गा। उनकी मृत्यु की तारीख, 5 सितंबर, अब उनका पर्व दिवस मनावा जात हय।[१]
शुरुआती जिनगी
[सम्पादन | स्रोत सम्पादित करैं]मदर टेरेसा का जनम २६ अगस्त १९१० का स्कॉप्जे (अब मेसीडोनिया मा) मा भा रहा। उनके अब्बा निकोला बोयाजू एक साधारण व्यापारी रहे। मदर टेरेसा का असली नाव अगनेस गोंझा बोयाजिजू रहा। अल्बेनियन भाषा मा गोंझा का मतलब होत हय "फूल की कली"।
जब ऊ बस आठ बरिस की रहीं, तभी उनके अब्बा गुजरि गए, जेकरे बाद उनकी परवरिश की सारी जिम्मेदारी उनकी अम्मा द्राना बोयाजू के ऊपर आइ गई। ऊ पाँच भाई-बहिनन मा सबसे छोटी रहीं। उनके जनम के समय उनकी बड़ी बहिन की उमर ७ बरिस अउर भाई की उमर २ बरिस रही, बाकी दुइ बच्चे बचपने मा चले गए रहे।
ऊ एक सुन्दर, पढ़ाकू अउर मेहनती लड़की रहीं। पढ़ाई के साथे गाना उन्हका बहुत पसंद रहा। ऊ अउर उनकी बहिन पास के गिरजाघर मा मुख्य गायिकाएँ रहीं।
ऐसा माना जात हय कि जब ऊ बस बारह बरिस की रहीं, तभई उन्हका एहसास हुइ गा कि ऊ अपनी सारी जिनगी मानव सेवा मा लगाईं। अठारह बरिस की उमर मा उन्होंने सिस्टर्स ऑफ लोरेटो मा शामिल होइ जाय का फैसला लइ लीन। ओकरे बाद ऊ आयरलैंड गईं जहाँ उन्होंने अंग्रेजी भाषा सीखी — काहे कि लोरेटो की सिस्टर्स इहै माध्यम से भारत मा बच्चन का पढ़ावत रहीं।
मिशनरीज़ ऑफ चैरिटी
[सम्पादन | स्रोत सम्पादित करैं]10 सितंबर 1946 का, दार्जिलिंग जात समय रेलगाड़ी मा, माता टेरेसा का एक गहरा आत्मिक अनुभव भा — जिन्हका ऊ बाद मा "बुलावे के भीतर बुलावा" कहिन। उनका लागा कि उन्हका गरीबन के बीच जाय के हय।
सन् 1950 मा उन्होंने मिशनरीज़ ऑफ चैरिटी की स्थापना करीं। ई संस्था शुरू मा कलकत्ता की झोपड़पट्टियन मा "सबसे गरीब गरीबन" की सेवा खातिर बनाई गई रही। धीरे-धीरे ई संस्था 133 से ज्यादा देशन मा फैलि गई, जहाँ 4,500 से ज्यादा ननैयाँ:
- HIV/AIDS, कोढ़, अउर तपेदिक के मरीजन की देखभाल करत रहीं
- सूप किचन, औषधालय, मोबाइल क्लीनिक, अनाथालय, अउर स्कूल चलावत रहीं
सन् 1952 मा उन्होंने कलकत्ता मा अपना पहिला धर्मशाला खोला — एक पुराने हिंदू मंदिर का निर्मल हृदय (कालीघाट होम फॉर द डाइंग) मा बदलि के।
सन् 1955 मा उन्होंने निर्मला शिशु भवन — बच्चन का घर — खोला, जौन अनाथ अउर बेघर बच्चन का आसरा देत रहा।
अंतर्राष्ट्रीय सेवा
[सम्पादन | स्रोत सम्पादित करैं]माता टेरेसा पाँच भाषा जानत रहीं — बंगाली, अल्बानियाई, सर्बो-क्रोएशियाई, अंग्रेजी अउर हिंदी।
सन् 1982 मा बेरूत की घेराबंदी के दौरान उन्होंने इजरायली सेना अउर फिलिस्तीनी लड़ाकुओं के बीच अस्थायी संघर्षविराम कराय के 37 बच्चन का बचाईं।
पुरस्कार अउर सम्मान
[सम्पादन | स्रोत सम्पादित करैं]मदर टेरेसा का उनकी सेवाओं खातिर कई पुरस्कारन अउर सम्माननसे नवाज़ा गा।
| पुरस्कार | साल |
|---|---|
| पोप जान तेइसवें का शांति पुरस्कार | १९३१ |
| टेम्पेलटन फाउण्डेशन पुरस्कार | — |
| पद्म श्री | १९६२ |
| नोबेल शांति पुरस्कार | १९७९ |
| भारत रत्न | १९८० |
| आर्डर ऑफ द ब्रिटिश एम्पायर | १९८८ |
विश्व भारती विद्यालय ने उन्हका देशिकोत्तम पदवी दीन — जौन उनकी तरफ से दी जाय वाली सबसे ऊँची पदवी होत हय।
अमेरिका के कैथोलिक विश्वविद्यालय ने उन्हका डॉक्टरेट की उपाधि दीन। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय ने उन्हका डी-लिट की उपाधि से नवाज़ा।
१९ दिसम्बर १९७९ का मदर टेरेसा का मानव-कल्याण कामन खातिर नोबेल पुरस्कार दीन गा। ऊ तीसरी भारतीय नागरिक रहीं जौन इ पुरस्कार से सम्मानित भईं।
नोबेल पुरस्कार की घोषणा से जहाँ दुनिया भर के पीड़ित लोगन मा खुशी फैलि गई, वहीं हर भारतीय नागरिक अपने का गौरवान्वित महसूस करीन।
संत घोषणा
[सम्पादन | स्रोत सम्पादित करैं]चमत्कार अउर बीटिफिकेशन
[सम्पादन | स्रोत सम्पादित करैं]माता टेरेसा की मृत्यु के बाद वेटिकन ने उनकी संत घोषणा की प्रक्रिया शुरू करी। सन् 2002 मा वेटिकन ने मोनिका बेसरा — एक भारतीय महिला — के पेट के ट्यूमर के ठीक होय का चमत्कार माना।
19 अक्टूबर 2003 का उन्हका पोप जॉन पॉल द्वितीय द्वारा बीटिफाई (धन्य घोषित) कीन गा।
संत घोषणा
[सम्पादन | स्रोत सम्पादित करैं]4 सितंबर 2016 का पोप फ्रांसिस ने संत पीटर्स स्क्वायर, वेटिकन सिटी मा उन्हका संत घोषित कीन। हजारन लोग ई समारोह मा मौजूद रहे, जिनमा 15 सरकारी प्रतिनिधिमंडल अउर 1,500 बेघर लोग भी शामिल रहे।[२]
विवाद
[सम्पादन | स्रोत सम्पादित करैं]अपर्याप्त चिकित्सा देखभाल
[सम्पादन | स्रोत सम्पादित करैं]कनाडाई शोधकर्तान के अनुसार, माता टेरेसा के क्लीनिकन मा लाखन डॉलर का चंदा आवत रहा, लेकिन वहाँ:
- व्यवस्थित चिकित्सा जाँच नाहीं होत रही
- दर्द निवारक दवाइयाँ पर्याप्त नाहीं रहीं
- पोषण की कमी रही[३]
आत्मिक जीवन
[सम्पादन | स्रोत सम्पादित करैं]माता टेरेसा लगभग 50 बरिस तक आत्मिक संदेह से जूझत रहीं। उन्होंने अपने पत्रन मा लिखा:
ई पत्र बाद मा माता टेरेसा: कम बी माई लाइट किताब मा प्रकाशित भए।
विरासत
[सम्पादन | स्रोत सम्पादित करैं]उनकी मृत्यु के समय मिशनरीज़ ऑफ चैरिटी के पास:
- 4,000 से ज्यादा ननैयाँ
- 300 सदस्यन का ब्रदरहुड
- 123 देशन मा 610 मिशन
रहे। संयुक्त राष्ट्र महासचिव जेवियर पेरेज़ डी कुएलर ने कहा:
5 सितंबर, उनकी मृत्यु की सालगिरह, अब संयुक्त राष्ट्र द्वारा अंतर्राष्ट्रीय दान दिवस के रूप मा मनावा जात हय।
सन्दर्भ
[सम्पादन | स्रोत सम्पादित करैं]- ↑ "सेवा की साकार मूर्ति थी "मदर टेरेसा"". पत्रिका समाचार समूह. ५ सितंम्बर 2014. मूल से से 23 दिसंबर 2014 के पुरालेखित. ई ५ सितंम्बर 2014 को पुनः प्राप्त कीन गा .
{{cite web}}: Check date values in:|accessdate=,|date=, and|archive-date=(मदद) - ↑ "मदर टेरेसा बनीं 'संत टेरेसा', वेटिकन सिटी में पोप ने दी उपाधि". Dainik Jagran (हिन्दी भाषा में). ई २०२०-१२-१० को पुनः प्राप्त कीन गा .
{{cite web}}: CS1 maint: date auto-translated (कड़ी) - ↑ https://web.archive.org/web/20160401151627/http://www.nouvelles.umontreal.ca/udem-news/news/20130301-mother-teresa-anything-but-a-saint.html. मूल से पुरालेखन के तिथि: १ अप्रैल २०१६.
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