मानव लिंग
मानव क देह मा लिंग एक बहरी जनन अंग ह, जउनसे पेशाब कइ जात ह अउ जउनसे वीर्य बाहर आवत ह। अंडकोष अउ ओकरे चारो ओर के बनावटन क संग लिंग, पुरुस क प्रजनन तंत्र क एक भाग क रूप मा काम करत ह।
लिंग क मुख्या भागन मा जड़, तन, लिंग क उपकला (जेमा डांड़ी क चमड़ी सामिल ह), अउ अग्रच्छद आवत ह, जउन ग्रंथि क ढँके रहत ह। लिंग क तन तीन ऊतक स्तंभन से बनल ह: पीठी ओर दू गो गुफानुमा कलेवर (corpora cavernosa) अउ उकरे बीच पेटी ओर एक फुलवार कलेवर (corpus spongiosum) होत ह। मूत्रनली पौरुष ग्रंथि से होकर जात ह, जहाँ ओकरे संग वीर्य वाहिनी नलिकन क मेल होत ह, अउ फिन ई लिंग से होत जात ह। मूत्रनली फुलवार कलेवर (corpus spongiosum) मा से होइके गुजरत ह अउ ग्रंथि क नोक पर एक छेद बनावत ह, जउन मूत्र छिद्र (urinary meatus) कहात ह।
स्तंभन लिंग क तनिके, बढ़ाव अउ सीधा होइब के अवस्था ह, जउन लैंगिक उत्तेजना क समय होइत ह।स्तंभन कबो-कबो लैंगिक उत्तेजना के बिना भी होइ सकत ह; किशोरावस्था अउ नींद क दौरान बिना लैंगिक कारण के अकस्मात स्तंभन अक्सर होत रहत ह। ढीला अवस्था मा लिंग छोट होइ जात ह, दबाव देइ पर नरम पड़ जात ह, अउ ग्रंथि ऊपर अग्रच्छद ढँक के रहत ह।पूरा स्तंभित अवस्था मा लिंग क डांड़ी कठोर होइ जात ह, जबकि ग्रंथि फूली रहत ह पर कठोर नाहीं होत। स्तंभित लिंग सीधा या टेढ़ो होइ सकत ह, अउ ई ऊपर, नीचे या सीधा आगें क ओर झुकल रह सकत ह। ना उमिर, ना ही ढीला लिंग क आकार, स्तंभित अवस्था मा लिंग क लंबाई क सही ढंग से बताइ सकत ह।
लिंग, स्त्रीअन मा पावे जाए वाला भगांकुर (clitoris) क समजात अंग ह।
संरचना
[सम्पादन | स्रोत सम्पादित करैं]मनई क लिंग क तीन मुख्य भाग अहइँ:
जड़: ई ओ हिस्सा ह जउन देह से जुड़ल होइथ। इहाँ बीच मा बत्ती (bulb) होत ह अउ बत्ती क दूनों ओर एक-एक क्रूस (crus) होत ह। ई सब चीज़ सतही पेरिनियल थैली (superficial perineal pouch) के भीतर होत हीं। क्रूस जउने ह pubic arch से जुड़ल रहत ह।
तना: लटकत हिस्सा ह, जउन लिंग क बाहरी भाग ह। एकरे दू सतह होत हीं: पीठी सतह (उठल लिंग मा इहाँ पिछेऊ ऊपर की ओर होइथ) अउ पेटी या मूत्रनली वाली सतह (ढीला लिंग मा नीचे अउ पिछे की ओर)। पेटी सतह पर लिंग मध्यरेखा (penile raphe) रहत ह। डांड़ी क जड़ पर एक निलंबन तंतु (suspensory ligament) सहारा देत ह, जउन pubic symphysis से जुड़ल रहत ह।
लिंग क उपकला: एह मा डांड़ी क चमड़ी, अग्रच्छद (prepuce), अउ ओकरे भीतर क प्राग्रच्छदीय म्यूकोसा (preputial mucosa) सामिल ह। अग्रच्छद ग्रंथि अउ डांड़ी क ढँक के सुरच्छा करत ह। ई उपकला डांड़ी से चिपकल नाहीं रहत, एह से ई आगे-पीछे सरक सकत ह।
मनई क लिंग अधिकतर दूसर जनावरन से भिन्न होइत ह, काहेकि एह मा बकुलम (baculum) या स्तंभन अस्थि नाहीं होत। एकर स्तंभन पूरा तरह से खून स भर जाइ क आधार पर होत ह। मानव क लिंग क कूल्हा में वापस नाहीं धकेल सकत ह, अउ ई प्राणी संसार मा शरीर भार क अनुपात में औसत से बड़ ह।
आकार
[सम्पादन | स्रोत सम्पादित करैं]सब्बे वानरन मनईन मा, लिंग मोटाई मा सबसे बड़ ह, बाकिर लंबाई मा ई चिंपांज़ी अउ कुछ दूसर वानरन क लिंग से मिलत-जुलत ह। लिंग क आकार पर आनुवंशिक कारण असर डालत हीं, बाकिर पर्यावरणी कारक भी जैसे कि प्रजनन संबंधी दवाइयाँ अउ रासायनिक या प्रदूषण क संपर्क, ओपर भी असर कर सकत ह।
जैविक क्रियाएँ
[सम्पादन | स्रोत सम्पादित करैं]मूत्रत्याग
[सम्पादन | स्रोत सम्पादित करैं]पुरुष मूत्राशय से मूत्र क मूत्रनली के माध्यम से बाहर निकारत हीं, जउन पौरुष ग्रंथि से होइके गुजरत ह, जहाँ ओमे वीर्य वाहिनी नलिकन क संगम होत ह, अउ फिन ई लिंग से होइके बाहर जात ह।
लिंग क जड़ (फुलवार कलेवर क निकट वाला सिरा) पर एक बाहरी संकोचक पेशी (external sphincter muscle) होत ह। ई एक छोट sphincter ह जउन धारीदार पेशी ऊतक से बनल ह अउ सेहतमंद पुरुषन मा ई इच्छानुसार नियंत्रण मा रहत ह। जब ई मूत्र संकोचक ढीला कइल जात ह, त ऊपरी मूत्रनली मा मौजूद मूत्र ठीक से लिंग मा आके मूत्राशय क खाली करत ह।
यौन उत्तेजना अउ आकर्षण
[सम्पादन | स्रोत सम्पादित करैं]लैंगिक उत्तेजन (जइसे मानसिक उत्तेजना — यौन कल्पना, संगी-साथी संग क्रिया, या हस्तमैथुन) क दौरान लिंग यौन आकर्षण पैदा करेला, जउन चरमसुख (orgasm) ले जा सकत ह।
ग्रंथि (glans) अउ संधिबंध (frenulum) लिंग क कामोत्तेजक क्षेत्र (erogenous zones) हवं। ग्रंथि मा बहुत अधिक स्नायुतंतुवन होत हीं, जइससे ई लिंग क सबसे संवेदनशील भाग बन जात ह।
लिंग क उत्तेजित करे क सबसे असरदार तरीका बा — मुख मैथुन (oral stimulation या fellatio), हाथ से उत्तेजना (manual stimulation या हस्तमैथुन), या यौन संसर्ग क दौरान। Frot उ प्रक्रिया ह जउन पुरुषन क बीच परस्पर लिंग क रगड़ से उत्तेजना दिहल जात ह।
स्तंभन
[सम्पादन | स्रोत सम्पादित करैं]स्तंभन लिंग क तनिके अउ उठे क अवस्था ह, जउन सामान्यत: यौन उत्तेजना क दौरान होत ह, पर ई बिना यौन कारणन के भी होइ सकत ह।किशोरावस्था मा अकस्मात स्तंभन अक्सर होत रहत ह — कपड़ा स घर्षण, मूत्राशय या बड़ी आँत क भरे होइब, हार्मोन क उतार-चढ़ाव, घबराहट, या बिना यौन भावना क कपड़ा उतारइ क कारण। नींद क दौरान अउ जागते समय स्तंभन होइब भी एकदम सामान्य बात ह।
वीर्यस्खलन
[सम्पादन | स्रोत सम्पादित करैं]वीर्यस्खलन लिंग स वीर्य क बाहर निकरइ क क्रिया ह। ई सामान्य रूप स चरमसुख (orgasm) क संग होत ह। एक श्रृंखलाबद्ध पेशीय संकुचनन क माध्यम स वीर्य — जेमे पुरुष जनन कोशिका (शुक्राणु) होत हीं — लिंग स बाहर निकरत ह। वीर्यस्खलन आमतौर पर यौन उत्तेजना क परिणाम ह, बाकिर कुछ दुर्लभ मामलन मा पौरुष ग्रंथि क रोग भी कारण बन सकत ह। वीर्यस्खलन नींद मा अपने-आप होइ सकत ह, जउन रात्रि स्खलन (nocturnal emission) कहाला। अवीर्यस्खलन (Anejaculation) उ स्थिति ह, जब पुरुष वीर्यस्खलन करइ मा असमर्थ होइ।
शुक्राणु अंडकोष मा बनत हीं अउ ओसे जुड़ल एपिडिडिमिस (epididymis) मा संचित रहत हीं। वीर्यस्खलन क दौरान, शुक्राणु वासा डिफ़रेंसिया (vasa deferentia) क माध्यम स ऊपर की ओर धकेलल जात हीं — ई दू नलिकन ह जउन मूत्राशय क ऊपर अउ पीछे से होइके जात हीं।
वीर्यकोश (seminal vesicles) स तरल मिलावल जात ह, अउ वासा डिफ़रेंसिया वीर्य-वाहिनी नलिकन (ejaculatory ducts) मा बदल जात हीं, जउन पौरुष ग्रंथि (prostate) क भीतर मूत्रनली स जुड़ जात हीं। पौरुष ग्रंथि अउ बल्बोमूत्रीय ग्रंथियाँ (bulbourethral glands) आउर तरल (जइसन क स्खलन पूर्व स्राव) जोड़त हीं, अउ फिन ई पूरा वीर्य लिंग क माध्यम स बाहर निकरत ह।