मुथुकुलम पार्वती अम्मा
मुथुकुलम पार्वती अम्मा (1904-1977) भारत के केरल से एक मलयालम भाषा के कवि, शिक्षक, अनुवादक, स्वतंत्रता सेनानी अऊर समाज सुधारक रहें। कविता, लघु कविता, नाटक, लघुकथा, बाल साहित्य, अनुवाद अउर जीवनी समेत साहित्य के कइयौ विधा मा किताब प्रकाशित किहिन। नारायण गुरु के अनुयायी पार्वती अम्मा भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का समर्थन करत रहें, अऊर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के ओर झुके रहें। मुथुकुलम पार्वती अम्मा पुरस्कार महिला साहित्यकारन का दीन जाय वाला साहित्यिक पुरस्कार होय।
जीवनी
[सम्पादन | स्रोत सम्पादित करैं]मुथुकुलम पार्वती अम्मा का जनम गुरुवार, 28 जनवरी, 1904 का मुथुकुलम के थट्टकट्टुसेरी घर से रामापनिकर अऊर केरल के वर्तमान अलाप्पुझा जिला के अरत्तुपुझा मा नल्लानिक्कल कंडाथिल घर के वेलुम्बियाम्मा के सबसे छोट बिटिया के रूप मा भवा रहा।[१] [२]पेशे से ज्योतिषी रामापनिकर भी एक प्रगतिशील विचारक रहे। केरल मा छुआछूत के समय भी, उ हिन्दू महाकाव्य रामायण अऊर महाभारत के नकल अऊर लिखिन अऊर बहुत लोगन का बांटिन। जबै पार्वती डेढ़ साल के रहैं तौ वहिके बाप के मउत होइगे रहै।[२]
ओकर बाद के जीवन कठिनाई से भरा रहा। उ समय के आम कानून के अनुसार, ओनका ओकरे पिता के पारिवारिक हिस्सा मिलै के संभावना नाहीं रही। यहिसे, उइ थट्टाकटुसेरी से एक छोट संपत्ति अऊर एक छोट घर मा चले गें, जेका उइ पहिले से हासिल किहिन रहैं। घर मा कठिनाई रहैं, पै वहिके बड़े भाई वहिके पालन-पोषण का इनतान से किहिन रहैं कि वहिका कउनौ असर नहीं पड़ा।[१] पार्वती कै प्राथमिक शिक्षा मुथुकुलम वाराणपल्ली प्राथमिक विद्यालय औ कीरीकड़ विद्यालय मा भै। उच्च जाति के छात्रन का जाति अऊर रूप-रंग के कारन काली अऊर पतली पार्वती के लगे बइठब पसंद नाहीं रहा। उ कक्षा मा जारी रखै में सक्षम रही, काहे से कि कानून इजाजत देत रहा। उ मुथुकुलम के कृष्णन नायर के पास भी पढ़ाई किहिन।[१]
साहित्यिक कैरियर
[सम्पादन | स्रोत सम्पादित करैं]बारह साल के उमर मा कविता लिखै लाग, पार्वती अम्मा के पहिली रचना यथार्थ जीविथम (अर्थ:वास्तविक जीवन) टी. सी. कल्याण्यम्मा के शारदा, एक महिला पत्रिका मा छपी। उदयप्रभ (मतलब:भोर के उजाला) नाव से प्रकाशित पहिला कविता संग्रह कै परिचय उल्लूर कै लिखा गा रहा। उल्लूर देखिन कि उनकर शैली कुमारन आसन के बहुत करीब है।[३]
1924 मा श्री नारायण गुरु के जन्मदिन समारोह मा, उ गुरु का समर्पित किलिपट्टू शैली मा लिखे गए छंद मा एक अभिनंदन तैयार अऊर गाए रहे। कविता सुनि कै गुरु बहुत तारीफ किहिन ॥[४]
कविता, लघु कविता, नाटक, लघुकथा, अनुवाद अउर जीवनी समेत साहित्य के कइयौ विधा मा किताब प्रकाशित कइ चुकी हैं। श्रीबुधा चरिथा (बुद्ध का जीवनी) कवि कुमारन आसन का अधूरा काम पार्वती अम्मा द्वारा पूरा किया गया। उ बच्चन के लिए एक एक्ट नाटक भी लिखिन हैं।[५]
सन्दर्भ
[सम्पादन | स्रोत सम्पादित करैं]- 1 2 3 https://janmabhumi.in/2024/01/29/3160295/vicharam/article/muthukulam-parvathyamma-is-the-poet-who-translated-the-bhagavad-gita-into-a-language-a-talented-poet/
- 1 2 മുതുകുളം പാർവ്വതി അമ്മ". Keralakaumudi Daily. Keralakaumudi.
- ↑ https://en.wikipedia.org/wiki/Sahithya_Pravarthaka_Co-operative_Society
- ↑ https://keralakaumudi.com/news/news.php?id=5453&u=sivagiri-acharya-smrithi-program-5453?amp=1
- ↑ https://books.google.co.in/books?id=KS0nDwAAQBAJ&dq=muthukulam+parvathi+amma+one+act+play&pg=PT103&redir_esc=y#v=onepage&q=muthukulam%20parvathi%20amma%20one%20act%20play&f=false