वन्यजीव अभयारण्य
अभयारण्य क अर्थ हउआ ऐसन वन क क्षेत्र, जहँ जीव-जंतु भय रहित जीवन बिता सकित हीं। एहिके सरकार या अन्य संस्थान लोगन द्वारा संरक्षित राखल जात हउआ। एहिक मुख उद्देश्य शिक्षा आ अनुसंधान खातिर जीव-जंतु, पक्षी अउर वन सम्पदाक संरक्षण, विकास अउर समुचित उपयोग करब हउआ। केंद्र आ राज्य सरकार वन्यजीव अभयारण्य अउर राष्ट्रीय उद्यानके स्थापना करति हीं। केंद्र सरकार कइयन परियोजननके अनुमति दिहिस जउन गंभीर रूप स लुप्त होइत प्रजातियनक संरक्षण खातिर बनाईं गइहीं।
कुछ अभयारण्य
[सम्पादन | स्रोत सम्पादित करैं]गिर वन्यजीव अभयारण्य
[सम्पादन | स्रोत सम्पादित करैं]गुजरात प्रदेश मा स्थित गिर अभयारण्य वन्यजीव स भरपूर स्थल अहै, जऊन करीब १,४२४ वर्ग किलोमीटर क्षेत्र मा फैलल अहै।[१] एह अभयारण्य मा फूल-पाति आ जानवरन क अनेक प्रजातियन क निवास अहै। एहमा स्तनधारीन क लगभग ३० प्रजाति, सरीसृप क २० प्रजाति अउर कीड़ा-पतंग आ पक्षियन क अनेक प्रकार पावल जात हीं। दक्षिण अफ्रीका क अलावा, ई दुनिया क ऐक मात्र ऐसन ठांव अहै जहँ सिंह आपन प्राकृतिक आवास मा देखल जाएक अहै। जंगली सिंह क अंतिम शरणस्थली रहे क नाते, गिर वन भारत क अत्यन्त महत्वपूर्ण वन्यजीव अभयारण्यन मा गिनल जाएक अहै। गिर वन क १९६९ मा वन्यजीव अभयारण्य क रूप मा घोषित कइल गा रहा, आ छः बरिस बाद एहिके १४०.४ वर्ग किलोमीटर क्षेत्र मा विस्तार कइल गा आ राष्ट्रिय उद्यान क रूप मा स्थापल कइल गा। वर्तमान मा एह अभयारण्य लगभग २५८.७१ वर्ग किलोमीटर क्षेत्र क घेरे अहै। वन्यजीव संरक्षण क सफल प्रयासन क कारण आज सिंहन क संख्या बढ़ि के ३१२ होइ गै अहै।

हरे-भरे पेड़न से भरपूर गिर वन नदी के किनारे सूखे पत्तेदार पेड़न अऊर कांटेदार झाड़ियन के साथे बसा अहै। हिंया के मुख्य पेड़न मा सागौन, शीशम, बबूल, बेर, जामुन अऊर बील शामिल हैं।
साल संख्या बाघिन, शावक भारत कय सबसे बड़ा हिरन, सांबर, चितल, नीलगाई, चिंकारा अऊर बरसिंगा, भालू अऊर लंबी पूंछ वाले लंगर कय एक बड़ी आबादी के साथे इहाँ देखल जा सकत है।
बहुत कम लोग जानत होइहैं कि गिर भारत मा एक प्रसिद्ध पक्षी अभयारण्य भी है। फल खावै वाला चील, कठफोड़वा, एरिओल, जंगल माइना अऊर पैराडाइज फ्लाईकैचर भी हिंया देखल जा सकत हैं।
ई अडोलिया, वाल्डेरा, रतनघुना अऊर पिपलिया जइसन पक्षियन का देखै के लिए भी एक उपयुक्त जगह है।
यहि जंगल मा मगरमच्छ फार्म विकसित कीन जात है, जेहिसे यहिके आकर्षण अउर बढ़ि जइहैं।
गिर वन्यजीव अभयारण्य अक्टूबर के मध्य से जून के मध्य तक आगंतुकन के लिए खुला रहत है लेकिन मानसून के मौसम मा बंद रहत है।
नगरहोल अभयारण्य
[सम्पादन | स्रोत सम्पादित करैं]कर्नाटक में स्थित नगरहोल अपने वन्यजीव अभयारण्य के लिए विश्व प्रसिद्ध अहै। ई उन कुछ जगहन में से एक अहै जहाँ एशियाई हाथी पावा जात हैं। हिंया हाथियन के बड़े झुंड देखै का मिलत अहै।
मानसून से पहिले बरसात के समय हिंया रंग-बिरंगे चिरई बड़ी संख्या में देखाई पड़त हैं, जे आपन चहक से पूरा वातावरण भर देत हैं।
जानवरन के प्रेमियन का हिंया देखै अऊर सीखै का बहुत कुछ अहै। ई जगह पहले मैसूर के राजान के शिकार के मैदान रही, लेकिन बाद में ई जगह अभयारण्य में बदल दीन्ह गय। अब राजीव गांधी अभयारण्य के नाम से जानल जात अहै, आ ई पार्क दक्कन पठार का हिस्सा अहै।
नगरहोले नदी जंगल से होते हुए कबिनी नदी में मिलति अहै। कबिनी नदी पर बने बांध से पार्क के दक्षिण में एक झील बन गई अहै, जे पार्क का बांदीपुर टाइगर रिजर्व से अलग करत अहै।
- चितल झुंड, नगरहोले डब्लू एल एस, मैसूर जिला
- चितल जोड़ी, नगरहोले डब्लू एल एस, मैसूर जिला
- ढोले (जंगली कुत्ता) का जोड़ा, नगरहोले डब्लूएलएस, मैसूर जिला
- हाथी का झुंड, नगरहोले डब्लू एल एस, मैसूर जिला
- प्रकृति पुकार!!, गौर झुंड, नगरहोले WLS, मैसूर जिला
- माले गौर, नगरहोले डब्लूएलएस, मैसूर जिला
- सांबर मां और फन, नगरहोले डब्लूएलएस, मैसूर जिला
ग्रेट भारतीय बस्टर्ड वन्यजीव अभयारण्य
[सम्पादन | स्रोत सम्पादित करैं]- भारत मा अभयारण्य
सन्दर्भ
[सम्पादन | स्रोत सम्पादित करैं]- ↑ "Gir National Park". www-gujarattourism-com.translate.goog. ई ११ नवम्बर २०२५ को पुनः प्राप्त कीन गा .
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