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शकुन्तला देवी

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शकुंतला देवी (४ नवंबर १९२९ – २१ अप्रैल २०१३) एक भारतीय मनसिक गनाकार, जोतिषी अउर लेखिका रहीं, जिनका "मानव कंप्यूटर" के नाव से मसहूर जाना जात रहा। उनकी परतिभा उनका १९८२ की गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स मा जगह दिलाइस। हालाँकि, इ रिकॉर्ड का परमाण-पत्र मरे के बाद ३० जुलाई २०२० का दीन गवा, जबकि देवी आपन विश्व रिकॉर्ड १८ जून १९८० का लंदन के इंपीरियल कॉलेज मा हासिल किहिन रहीं। देवी एक तेज-तर्रार लइकी रहीं, अउर उनहन बिना कौनो औपचारिक सिच्छा के मैसूर विश्वविद्यालय मा आपन अंकगणित की जबरदस्त ताकत क परदरसन किहिन रहा।

शकुंतला देवी

देवी छात्रन खातिर गिनती-जोड़ के हिसाबन का सरल बनावे की जतन किहिन। उनहन आपन बाद के बरसन मा कई किताबें लिखिन, जेमा उपन्यास अउर गणित, पहेलियाँ अउर जोतिष पर ग्रंथ सामिल रहे। उनहन 'समलैंगिकन की विश्व' नाव की एक किताब लिखिन, जेका भारत मा समलैंगिकता क पहिला अध्ययन मानत हैं। उनहन समलैंगिकता का नीक नजरिया से देखिन अउर इ छेत्र मा अगुवा मानी जाथीं।

बचपन अउर सुरुआती जिनगी

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शकुंतला देवी क जनम ४ नवंबर १९२९ का बंगलोर, कर्नाटक मा एक कन्नड़ ब्राह्मण परिवार मा भवा। उनके बाबा, सी.वी. सुंदरराजा राव, एक सरकस मा झूला-कलाकार, सेर क काबू करे वाले, रस्सी पर चले वाले अउर जादूगर के रूप मा कार्य करत रहे। उनके बाबा आपन लइकी की गिनती याद करे की ताकत तब जानिन, जब उ उनका तीन बरिस की उमर मा ताश के पत्तन का खेल सिखावत रहे। बाबा सरकस छोड़िन अउर लइकी का लइके सड़क-सड़क नुमाइस करे लगिन, जहाँ उनकी गिनती की कला क परदरसन होत रहा। इ सब उनहन बिना कौनो औपचारिक सिच्छा के किहिन। छव बरिस की उमर मा उनहन मैसूर विश्वविद्यालय मा आपन अंकगणित की कला क परदरसन किहिन। सन १९४४ मा, पंदरह बरिस की उमर मा, देवी लंदन, यूनाइटेड किंगडम चली गइन।

देवी विश्व के कई देशन मा घूमिन अउर आपन अंकगणित की कला क परदरसन किहिन। उ सन १९५० भर यूरोप के दौरे पर रहीं अउर सन १९७६ मा न्यूयॉर्क सिटी मा रहीं। सन १९८८ मा उ अमेरिका गइन, जहाँ यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, बर्कले के सिच्छा मनोविज्ञान के परोफेसर आर्थर जेनसेन उनकी ताकत क अध्ययन किहिन। जेनसेन उनका कई तरह के हिसाब-किताब मा आजमाइन, जेमा बड़े-बड़े अंकन की गिनती सामिल रही। उनके सामने राखी गई परीक्षावन मा ६१,६२९,८७५ का घनमूल अउर १७०,८५९,३७५ का सातवाँ मूल निकाले जइसन प्रश्न रहे। जेनसेन बतइन कि देवी इ दुनों प्रश्नन के उत्तर — ३९५ अउर १५ — एतनी जल्दी दे दिहिन कि उ आपन कापी मा लिख भी नाहीं पाए। जेनसेन आपन खोज सन १९९० मा 'इंटेलिजेंस' नाव की सोधपत्रिका मा छपवाइन।

सन १९७७ मा, सदर्न मेथोडिस्ट यूनिवर्सिटी मा, उनहन २०१ अंकन वाले एक संख्या का २३वाँ मूल मात्र ५० सेकेंड मा निकालिन। उनका उत्तर ५४६,३७२,८९१ रहा, जेका अमेरिका के ब्यूरो ऑफ स्टैंडर्ड्स मा UNIVAC ११०१ कंप्यूटर से पक्का किया गवा। इ इतना बड़ा हिसाब करे खातिर कंप्यूटर मा खास परोग्राम लिखे गवा रहा, अउर तउनो कंप्यूटर का सही उत्तर आवे मा ६२ सेकेंड लागिन।

१८ जून १९८० का उनहन दू १३-अंकी संख्यावन — ७,६८६,३६९,७७४,८७० × २,४६५,०९९,७४५,७७९ — का गुणा करके परदरसन किहिन। इ संख्याएँ लंदन के इंपीरियल कॉलेज के कंप्यूटिंग विभाग अचानक चुनिन रहे। देवी २८ सेकेंड मा सही उत्तर — १८,९४७,६६८,१७७,९९५,४२६,४६२,७७३,७३० — दे दिहिन। इ घटना १९८२ की गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स मा दर्ज भई। लेखक स्टीवन स्मिथ कहिन, "इ नतीजा अबतक के सब कुछ से इतना आगे बा कि एका अबिस्वासनीय ही कहा जा सकत है।"

शकुंतला देवी आपन सन १९७७ की किताब 'फिगरिंग: द जॉय ऑफ नंबर्स' मा मनसिक गणना खातिर आपन तरीकन का बिस्तार से समझाइन।

समलैंगिकता पर किताब

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सन १९७७ मा उनहन 'द वर्ल्ड ऑफ होमोसेक्सुअल्स' लिखिन, जउन भारत मा समलैंगिकता पर पहिली छपी सोधपरक पढ़ाई रही, जेके चलते उनकी आलोचना भी भई। 'फॉर स्ट्रेट्स ओनली' नाव की डॉक्यूमेंट्री मा उनहन बतइन कि इ बिसय मा उनकी रुचि एसलिए भई काहेकि उनकी सादी एक समलैंगी मरद से भई रही अउर उ इ बात का नजदीक से समझे की चाहत रखत रहीं।

इ किताब, जेका "अगुवाई करे वाली" माना जात है, मा दू नौजवान भारतीय समलैंगी मरदन से बातचीत, कनाडा मा रहे वाले एक जोड़े की कहानी जउन कानूनी सादी करे चाहत रहे, एक मंदिर के पुजारी के बिचार जउन समलैंगिकता पर आपन मत रखत हैं, अउर समलैंगिकता पर पहिले से उपलब्ध साहित्य की समीक्छा सामिल है। किताब के आखिर मा समलैंगिकता का अपराध की सूची से बाहर करे की माँग उठाई गई है, अउर "पूरा अउर सम्पूर्ण स्वीकृति — न कि बस सहनसीलता अउर हमदर्दी" की बात कही गई है। हालाँकि, इ किताब उस बखत जियादा-तर लोगन की नजर मा नाहीं आई।

देवी १९६० के दसक के बीच मा भारत लउटिन, अउर उनकी सादी कोलकाता के भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी परितोष बनर्जी से भई। सन १९७९ मा दुनों के बीच तलाक होइ गवा, जब उनके मरद की समलैंगिकता उजागर होए की बात कही गई। उनकी बिटिया अनुपमा बनर्जी का कहनाम रहा कि देवी आपन समलैंगिकता वाली किताब क परचार करे खातिर मरद पर (खाना) इलजाम लगाइन, काहेकि इ बिसय पर उनकी बिसवसनीयता पर प्रश्न उठत रहे।

सन १९८० मा उनहन मुंबई साउथ अउर आंध्र परदेश (अब तेलंगाना) के मेडक से लोकसभा चुनाव मा निर्दलीय उम्मीदवार के रूप मा भाग लिहिन। मेडक मा उ पूर्व परधानमंत्री इंदिरा गाँधी के खिलाफ खड़ी भईं अउर कहिन कि उ "मेडक के लोगन का श्रीमती गाँधी के हाथे ठगाए से बचावे" चाहत हैं। उ नवाँ स्थान पर रहीं अउर उनका ६,५१४ मत मिले, जउन कुल मतन के १.४७ परतिसत रहे। देवी १९८० के दसक के सुरुआत मा बंगलोर लउटि गइन।

मनसिक गनाकार के रूप मा आपन कार्य के अतिरिक्त, देवी एक जानी-मानी जोतिषी अउर कई किताबन की लेखिका भी रहीं, जेमा खाना पकावे की किताबें अउर उपन्यास सामिल रहे। उनहन छोटी कहानियाँ अउर जासूसी उपन्यास लिखे से सुरुआत किहिन, अउर उनका संगीत मा भी गहरी रुचि रही।

मृत्यु अउर विरासत

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अप्रैल २०१३ मा देवी का साँस लेए मा बहुत तकलीफ होए लगी अउर उनका बंगलोर के एक अस्पताल मा भर्ती कराई गवा। अगले दू हफ्तन मा उनका दिल अउर गुर्दे की भी तकलीफ होए लगी। २१ अप्रैल २०१३ का उनकी अस्पताल मा मृत्यु होइ गई। उ ८३ बरिस की रहीं। उनकी बिटिया अनुपमा बनर्जी की सादी अजय अभय कुमार से भई है, जेनके संगे उनकी दू बिटियाएँ हैं, अउर उ लंदन मा रहत हैं।

४ नवंबर २०१३ का, जउन उनका ८४वाँ जनमदिन होत, गूगल उनका गूगल डूडल से सम्मान दिहिस। उनकी जिनगी पर 'शकुंतला देवी' नाव की एक फिलिम मई २०१९ मा घोषित भई। इ फिलिम मा विद्या बालन मुख्य भूमिका मा रहीं अउर सान्या मल्होत्रा, अमित साध अउर जिशू सेनगुप्ता सहायक भूमिकावन मा रहे। सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स परोडक्सन्स द्वारा बनाई गई इ फिलिम ३१ जुलाई २०२० का विश्व भर मा अमेजन परइम वीडियो पर आई।


  1. https://www.bbc.com/hindi/media-53427445