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सावित्रीबाई फुले

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सावित्रीबाई फुले
सावित्रीबाई फुले कय मूर्ति। ई काली रंग कय बस्ट (आधी मूर्ति) अहै जौन लकड़ी कय चबूतरा पय धरी अहै। चबूतरा पय "क्रांतिज्योति सावित्रीबाई फुले" लिखल अहै। वन साड़ी पहिने अहैं।
सावित्रीबाई फुले कय मूर्ति (बस्ट)।
जनम३ १८३१
नायगाँव, बॉम्बे प्रेसीडेंसी, कंपनी राज (भारत)
मौत10 १८९७(१८९७-एक्स्प्रेशन त्रुटि: अनपेक्षित उद्गार चिन्ह ""-10) (उम्र 66)
पूना, बॉम्बे प्रेसीडेंसी, ब्रिटिश भारत
पढ़ाई
  • नॉर्मल स्कूल, पूना
    * टीचर्स ट्रेनिंग प्रोग्राम, अहमदनगर
रोजगार
  • शिक्षिका
  • कार्यकर्ता
  • समाज सुधारक
  • कवयित्री
कार्यकाल१८४८–१८९७
संस्थानसत्यशोधक समाज
प्रसिद्धी कै कारणलरिकिन कय शिक्षा
औरतन कय अधिकार
प्रसिद्ध कार्यकाव्य फुले (१८५४)
बावन कशी सुबोध रत्नाकर (१८९२)
जिवनसाथीज्योतिराव फुले

सावित्रीबाई फुले (१८३१–१८९७) एक महान भारतीय शिक्षिका, समाज सुधारक अउर कवयित्री रहिन, जेनका आधुनिक भारत कय पहिली महिला शिक्षिका मानल जात है।[] माली समाज मा जनमी सावित्रीबाई कय बियाह बहुत कम उमिर मा होइ गा रहा अउर प्रारम्भ मा वन एकदम अनपढ़ रहिन। मुला ओनके पति ज्योतिराव फुले वनका घरै पय पढ़ावा-लिखावा अउर बाद मा वन ट्रेनिंग लइ के भारत कय पहिली प्रशिक्षित महिला हेडमास्टर बनिन। ई दुन्नो जने मिल के महाराष्ट्र मा औरतन कय पढ़ाई अउर हक खर्तिन बहुत बड़का कार्य कीहिन। समाज कय भारी विरोध सहै कय बादौ, १८४८ मा वन लोग पुणे कय भिड़े वाडा मा लरिकिन कय पहिला स्कूल खोलिन जेहमा गणित अउर विज्ञान जइसन प्रगतिशील विषय पढ़ावा जात रहे। १८५१ तक वन लोग मिल के अइसन १८ स्कूल खोलि चुके रहे।[]

एकरे अतिरिक्त जात-पात अउर भेदभाव मिटावै खर्तिन वन १८५१ मा "महिला सेवा मंडल" अउर १८५३ मा बेसहारा विधवा औरतन कय बच्चन कय जान बचावै खर्तिन "बालहत्या प्रतिबंधक गृह" बनवाइन। १८७३ मा वन 'सत्यशोधक समाज' कय स्थापना मा भी बड़की सहयता कीहिन अउर ओकरी महिला शाखा कय अगुवाई कीहिन। समाज सुधार कय साथे-साथे वन बहुत नीक कविताई भी करत रहिन, जेहमा १८५४ मा छपी 'काव्य फुले' अउर १८९२ मा छपी 'बावन कशी सुबोध रत्नाकर' बहुत मशहूर अहैं। १८९७ मा 'प्लेग' कय भयंकर बीमारी मा अउरन कय सेवा करत-करत ओनकर निधन होइ गा। आज पूरे देश मा वनका बहुत सम्मान से "भारत मा आधुनिक शिक्षा कय महतारी" कय रूप मा याद कीन जात है।

सावित्रीबाई फुले कय जनम ३ जनवरी १८३१ कय महाराष्ट्र कय सतारा जिला कय नायगाँव मा भवा रहा। वन लक्ष्मी अउर खंडोजी नेवसे पाटिल कय चार बच्चन मा सबसे छोट बिटिया रहिन, अउर ई परिवार माली समाज कय रहा। महज़ ९ वर्ष कय उमिर मा सावित्रीबाई कय बियाह ज्योतिराव फुले से होइ गा रहा, जौन ओय समय १३ वर्ष कय रहे।

बियाह कय टेम सावित्रीबाई एकदम अनपढ़ रहिन, मुला ओनके पति अउर सगुनाबाई क्षीरसागर वनका खेत मा कार्य करत समय घरै पय पढ़ावा-लिखावा। ज्योतिराव कय साथे प्रारम्भी पढ़ाई पूरा करै कय बाद, वन अपन दोस्तन कय सहयता से आगे कय पढ़ाई जारी रखिन अउर १८४६-४७ मा एक अंग्रेजी स्कूल से तीसरी-चौथी कय परीक्षा पास कीहिन। उहै वर्ष वन दलित समाज कय ताईं एक स्कूल खोलै मा सगुनाबाई कय सहयता भी कीहिन। एकरे बाद वन टीचर (शिक्षिका) बनै कय दुई ठु ट्रेनिंग लीहिन—पहिला अहमदनगर मा एक अमेरिकी मिशनरी कय संस्था मा अउर दूसर पुणे कय नॉर्मल स्कूल मा। ई तरे ट्रेनिंग पूरा कइ के वन भारत कय पहिली प्रशिक्षित (ट्रेंड) महिला शिक्षिका अउर हेडमास्टर बनिन।

काम-काज अउर जोकदान

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टीचर कय ट्रेनिंग पूरा करै कय बाद सावित्रीबाई फुले सगुनाबाई क्षीरसागर कय साथे मिल के पुणे मा लरिकिन कय पढ़ावै लाग रहिन। जनवरी १८४८ मा ई लोग भिड़े वाडा मा भारत कय लरिकिन कय पहिला स्कूल खोलिन, जेहमा ९ से बढ़त-बढ़त २५ लरिकिन पढ़ै लाग रहिन अउर हुवाँ गणित, विज्ञान अउर सामाजिक विज्ञान जइसन पश्चिमी विषय पढ़ावा जात रहा। समाज कय भारी रूढ़िवादी विरोध कय नाते वन लोगन कय ई जगह छोड़ि के उस्मान शेख कय घरै जाय का पड़ा, जहँवा सावित्रीबाई अउर फातिमा शेख मिल के पढ़ावै कय कार्य जारी रखिन। १८५१ कय अंत तक वन लोग १५० लरिकिन कय ताईं तीन ठु स्कूल चलावै लाग रहे।[] ओनकर पढ़ावै कय तरीका एतना नीक रहा कि सरकारी स्कूलन कय लरिकन से जादा लरिकिन ओनके स्कूल मा पढ़त रहिन। ई कार्ययाबी कय साथे-साथे वन लोगन कय भारी अउर भयंकर विरोध भी सहै का पड़ा; सावित्रीबाई कय ऊपर लोग गोबर अउर पाथर फेंकत रहे जेकरे नाते वनका स्कूल जात समय एक अउर साड़ी साथे लइ जाय का पड़त रहा। १८४९ मा समाज कय तान अउर दबाव मा ज्योतिराव कय पिता भी ई दंपति कय घर से निकार दीहिन काहे कि ई कार्य कय धर्मग्रंथन कय खिलाफ मानल जात रहा। घर से निकारे जाय कय बाद वन लोग उस्मान शेख कय हिँया रहै लाग, जहँवा फातिमा शेख (जौन ट्रेनिंग लइ के भारत कय पहिली मुस्लिम महिला शिक्षिका बनिन) कय साथे मिल के १८४९ मा शेख कय घरै एक नवा स्कूल खोलिन। १८५० कय दशक मा ई लोग शिक्षा कय बढ़ावा देवै खर्तिन दुई ठु ट्रस्ट भी बनाइन अउर अलग-अलग जांति कय बच्चन कय ताईं कुल १८ स्कूल खोलिन। १८५२ तक ओनके स्कूलन मा २७३ लरिकिन पढ़त रहिन, मुला १८५७ कय क्रांति कय बाद चंदा मिलब बंद होय अउर सरकारी सहयता हटै कय नाते १८५८ तक ई सब स्कूल बंद होइ गए। शिक्षा कय अतिरिक्त समाज सुधार कय ई सफर मा १८६३ मा वन लोग अपन दोस्त सदाशिव बल्लाल गोवंडे कय साथे मिल के बेसहारा गर्भवती विधवा औरतन कय जान बचावै खर्तिन "बालहत्या प्रतिबंधक गृह" भी बनवाइन। एहमा विधवा मेहररुइन सुरक्षित अउर छुपि के अपन बच्चन कय जनम दइ सकत रहिन अउर वन अनाथ बच्चन कय पालन-पोषण आश्रम करत रहा; ई नेक कार्य १८८० कय दशक कय बीच तक चला।


  1. Pawar, Nikhil (३ जनवरी २०२५). "Savitri Bai Phule was the countrys first female teacher fought a long battle to eradicate untouchability from the society". Jagran (हिन्दी भाषा में). ई ३१ मार्च २०२६ को पुनः प्राप्त कीन गा .{{cite web}}: CS1 maint: date auto-translated (कड़ी)
  2. Somanaboina & Ramagoud 2021, पृ॰ 63.
  3. Raikar, Sanat Pai (६ मार्च २०२६). "Life, Jyotirao, Works, Legacy, & Facts". Encyclopedia Britannica. ई ३१ मार्च २०२६ को पुनः प्राप्त कीन गा .{{cite web}}: CS1 maint: date auto-translated (कड़ी)