सी. आर. राजगोपालन
| सी. आर. राजगोपालन | |
|---|---|
| जनम | 1957 पेरुमपुलीसेरी, त्रिशूर जिला, केरल, भारत |
| निधन | 31 जनवरी 2022 त्रिशूर, केरल, भारत |
| पेशा/दायित्व | लोककथा शोधकर्ता, लेखक |
| जीवनसाथी | शीतल वी. एस. |
| माता-पिता | रामा पणिकर नारायणी अम्मा |
| पुरस्कार | केरल लोककथा अकादमी पुरस्कार केरल संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार |
सी. आर. राजगोपालन (लगभग 1957 - 31 जनवरी 2022) केरल के एक भारतीय लेखक, शिक्षक अऊर पर्यावरण कार्यकर्ता रहें। राजगोपालन लोक कथा अऊर आदिवासी संस्कृति के निगरानी अऊर संरक्षण के लिए काम किहिन। उ विरासत अऊर लोक कथा अध्ययन पर कईयो किताब लिखिन हैं। केरल लोककथा अकादमी अऊर केरल संगीत नाटक अकादमी से उनका पुरस्कार मिला।
जीवनी
[सम्पादन | स्रोत सम्पादित करैं]राजगोपालन का जनम केरल के त्रिशूर जिला के पेरुम्पुलिसेरी मा रामा पनिकर अऊर नारायणी अम्मा के घरे भवा रहा।[१] उ सी. एन. एन. हाई स्कूल, त्रिशूर गवर्नमेंट कॉलेज अऊर श्री केरल वर्मा कॉलेज मा पढ़ाई किहिन। उ कालीकट विश्वविद्यालय से थेयम, कुम्मट्टी, थिरापुटनम, कृष्णनत्तम मा इस्तेमाल कीन जाय वाले मुखौटा के नाट्य पहलुअन अऊर आधुनिक नाट्य प्रथा मा ओनके प्रासंगिकता मा आपन पीएचडी किहिन।[२] उ केरल वर्मा कॉलेज, त्रिशूर मा एक एसोसिएट प्रोफेसर अऊर केरल विश्वविद्यालय मा डीन के रूप मा काम किहिन।[२] उ भारत सरकार के केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय से जूनियर फेलोशिप प्राप्त किहिन हैं, अऊर जातीय संगीत पर परियोजना अऊर लोक रंगमंच के राष्ट्रीय सौंदर्यशास्त्र पर यूजीसी के प्रमुख परियोजना किहिन हैं। राजगोपालन त्रिशूर मा लोककथा अध्ययन के केंद्र नट्टारिवु पदना केंद्र के निदेशक अऊर केरल विश्वविद्यालय करियावत्तम परिसर के केरल अध्ययन के लिए अंतर्राष्ट्रीय केंद्र (आईसीकेएस) के निदेशक के रूप मा भी काम किहिन हैं।[३]
उ लोककथाओं पर कईयो किताबें लिखिन, लोकगीतन के एल्बम अऊर लोककथाओं पर वृत्तचित्रन का निर्देशित किहिन अऊर ग्रीस, चीन, पोलैंड, इटली, इंग्लैंड, स्विट्जरलैंड, रोम, जिनेवा अऊर ऑक्सफोर्ड मा शोध पत्र प्रस्तुत किहिन हैं। लोक ज्ञान पर 20 किताबन के श्रृंखला डीसी बुक्स के नत्तरीवुकल के महासंपादक अऊर कृषि गीता के संपादक भी रहे हैं।[१] उ जिनेवा स्थित विश्व बौद्धिक संपदा संगठन के विरासत ज्ञान बैठक मा भाग लिहिन। उ लोककथाओं पर पत्रिकाओं मा नियमित योगदान देत रहें।[४]
राजगोपालन पर्यावरण प्रदूषण के खिलाफ विभिन्न आंदोलनन मा सक्रिय रूप से शामिल रहे अऊर पर्यावरण संरक्षण, वैकल्पिक राजनीति अऊर जीवन शैली के गंभीर समर्थक रहे। जापानी किसान अऊर दार्शनिक मसानोबू फुकुओका द्वारा वन स्ट्रॉ रिवोल्यूशन किताब के मलयालम अनुवाद के प्रकाशन मा उनकर समर्थन महत्वपूर्ण रहा।[५]
व्यक्तिगत जीवन और मृत्यु
[सम्पादन | स्रोत सम्पादित करैं]उनकर शादी शीतल वी. एस. से भै रही। 31 जनवरी 2022 का 64 साल के उमर मा कोविड-19 से उनकर मृत्यु होइ गै। एक शोक पत्र मा केरल राज्य के उच्च शिक्षा अऊर सामाजिक न्याय मंत्री आर. बिंदु कहिन कि स्वर्गीय राजगोपालन लोककथा अध्ययन के पर्यायवाची रहे।[६]
काम करत है
[सम्पादन | स्रोत सम्पादित करैं]विरासत अऊर लोककथा अध्ययन पर ओनके चयनित किताबन मा एल्लम कठियेरियुकायनु, अलयुन्नवर, मुदियेट्टू, नादोदी नट्टरंग, लोककथा सिधानथंगल, कावेत्तम, नादान कलरूपंगल, करुठानिकलुडे कोयथ, गोथरा कलवदिवुकल, देशीया सौंदरीबौद, नवेल्लान पोटतुकुठेन्दा, कृषि गीतयुम भक्ष्य सुरक्षायुम, पूजायुड़े नट्टारिवुकल, अन्नवुम संस्कारवुम, वरिक्कप्लविनुवेन्दी ओरू वडक्कनपाट्टू, आटक्कोलंगल, केरलीया रामगा कला चरित्रम, मन्नू, लवान्यम, प्रथिरिधाम, नात्तुनावते मोटिराम, कांठिन काटिराम, नोकुम्पोल, डायस्फोरा, एरुमाडंगल अऊर नट्टारिव, मलयाली विरासत के 2000 साल।[७]
संपादक के रूप मा
[सम्पादन | स्रोत सम्पादित करैं]डीसी बुक्स के नट्टरिवुकल श्रृंखला के 20 किताबन मा से, उ किताबन का संपादित किहिन काट्टरिवुकल (वन ज्ञान पर किताब), नाट्टू भक्षणम (स्थानीय खाद्य पदार्थन पर किताब) नाट्टू वैद्यम (पारंपरिक चिकित्सा पर किताब), नाट्टू संगीतम (पारंपरिक संगीत पर किताब), सस्यांगलुडे नट्टारीव (स्थानीय प्रजाति पर सूचना), पौधन के बारे मा जानकारी), कृष नट्टारीवुकल (पारंपरिक खेती ज्ञान पर पुस्तक), नादोदी कैवेला (लोक हस्तकर्म पर पुस्तक), पूक्कलुम पक्षिकलम (फूल और पक्षियों पर पुस्तक), जंथुकलुम नट्टारीवुकलम (स्थानीय जानवरों पर पुस्तक), नीररिवुकल (पानी के ज्ञान पर पुस्तक) और पुझायुदे नाट्टरिवुकल (नदियों के बारे में स्थानीय ज्ञान पर पुस्तक)।[१]
उइ समर रेन, हार्वेस्टिंग द इंडिजेनस नॉलेज ऑफ केरल, पिल्लेरथलम, नात्रिविन्ते निनव, उप्पुम चोरम नाट्टुचरिथ्रम, पिरावी अऊर वायल्कालकल किताबन का भी संपादित किहिन।[३]
सन्दर्भ
[सम्पादन | स्रोत सम्पादित करैं]- 1 2 3 "Archive copy". मूल से से २०२२-०२-०१ के पुरालेखित. ई २०२६-०३-३१ को पुनः प्राप्त कीन गा .
{{cite web}}: CS1 maint: archived copy as title (कड़ी) CS1 maint: date auto-translated (कड़ी) - 1 2 https://www.thehindu.com/news/national/kerala/folklore-researcher-cr-rajagopalan-no-more/article38353253.ece
- 1 2 https://www.newindianexpress.com/cities/thiruvananthapuram/2012/mar/30/tunes-of-tradition-353889.html
- ↑ https://www.doolnews.com/writer-and-folklore-researcher-dr-c-r-rajagopalan-passed-away-64.html
- ↑ https://timesofindia.indiatimes.com/city/kochi/folklore-scholar-rajagopalan-dies/articleshow/89258859.cms
- ↑ "Archive copy". मूल से से २०२५-०२-१७ के पुरालेखित. ई २०२६-०३-३१ को पुनः प्राप्त कीन गा .
{{cite web}}: CS1 maint: archived copy as title (कड़ी) CS1 maint: date auto-translated (कड़ी) - ↑ https://www.manoramaonline.com/news/latest-news/2022/01/31/dr-cr-rajagopal-passes-away.html