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सुइयाब

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तुर्गेश खागानात कॆ समय सुइयाब

सुइयाब (अंग्रेजी: Suyab; फारसी: سوی آب; चीनी: 碎葉 / 碎叶; पिनयिन: Suìyè) मध्य एशिया कॆ इतिहासिक नगर हय, जौका ‘‘ओर्दुकेंत’’ नाम से भी जानल जात हय अउर आज कॆ किर्गिस्तान कॆ ‘‘अक-बेशिम’’ स्थल से पहिचानल जात हय। ई नगर चुई नदी कॆ घाटी मा बसा रहय अउर रेशम मार्ग कॆ प्रमुख पड़ावन मा एगो रहय। बिस्केक से लगभग ५० किलोमीटर पूरब अउर तोकमोक से ८ किलोमीटर दक्षिण-पच्छिम ई नगर कॆ अवशेष मिलत हीं। २०१४ मा सुइयाब कॆ स्थल ‘‘सिल्क रोड्स: चांग’आन–तियानशान कॉरिडोर’’ नामक यूनेस्को विश्व धरोहर सूची मा शामिल भइल।[]

सुइयाब कॆ शुरुआती बसावट ५वीं–६वीं सदी कॆ दौरान सोघद व्यापारीन द्वारा भइल। नगर कॆ नाम सुइयाब नदी से आवत हय, जौन फारसी भाषिक मूल वाला शब्द हय। चीनी यात्री ‘‘ह्वेनसांग’’ ६२९ ई. मा जब ई क्षेत्र से गुज़रिन, त ऊ सुइयाब कॆ आकार, जनसंख्या, खेती, कपड़ा अउर व्यापारिक गतिविधियन कॆ विस्तृत बिबरण लिखिन।[]

७वीं सदी मा तुर्क शासक ‘‘तोंग याबघु क़ाग़ान’’ कॆ शासन मा सुइयाब पश्चिमी तुर्क क़ाग़ानात कॆ मुख्य राजधानी बनल। ई समय नगर मा सोघद व्यापारी अउर तुर्क सैना कॆ बीच व्यावसायिक–सैन्य सहजीवन देखे के मिलत हय। बाद मा पश्चिमी तुर्क क़ाग़ानात कॆ पतन के बाद सुइयाब तांग साम्राज्य द्वारा ६४८–७१९ के बीच सैनिक चौकी कॆ रूप मा इस्तेमाल भइल। तांग क़िलाबंदी ६७९ ई. मा बनल, जइससे ई क्षेत्र मा बौद्ध धर्म कॆ विकास भी देखल गा | कुछ चीनी स्रोतन अनुसार प्रसिद्ध कवि ली बाई कॆ जनम भी सुइयाब मा भइल मानल जात हय।[]

७१९ ई. मा तांग शासकन द्वारा सुइयाब कॆ नियंत्रण तुर्क शासक ‘‘सुलु’’ कॆ हवाले कइल गइल। लेकिन ७३८ ई. कॆ बाद चीनी सेना फिरु से सुइयाब पर अधिकार कइली। ८वीं सदी मा तिब्बती सेनन अउर तांग साम्राज्य कॆ संघर्ष मा ई नगर महत्वपूर्ण रक्षा केंद्र बनल। ७६६ ई. मा करलुक शासकन द्वारा ई नगर क़ब्जा कइल गइल।[]

९वीं–१०वीं सदी कॆ बिबरण सीमित मिलत हय, लेकिन ‘हुदुद अल-आलम Hudud al-Alam’ (९८३ ई.) मा सुइयाब कॆ लगभग २०,००० जनसंख्या वाला नगर बतावल गइल हय। ११वीं सदी कॆ शुरुआत मा सुइयाब कॆ स्थान पर ‘‘बलासागुन’’ प्रमुख नगर बनल अउर सुइयाब धीरे-धीरे खाली हो गइल।[]

पुरातात्त्विक स्थल

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अक-बेशिम कॆ अवशेषन कॆ १९वीं सदी कॆ अंत मा गलती से बलासागुन समझल गइल, लेकिन १९५० कॆ उत्खनन मा साबित भइल कि ई स्थल ११वीं सदी से पहिले छोड़ल गइल रहय। सुइयाब कॆ स्थल लगभग ३० हेक्टेयर क्षेत्र मा फैलल हय अउर ई नगर कॆ बहु-सांस्कृतिक चरित्र कॆ प्रमाण देत हय।[]

इहाँ चीनी क़िलाबंदी, बौद्ध मंदिर, नेस्टोरियन ईसाई गिरजा, सोघद–उइग़ुर लिपि वाली दीवार लेख, ज़ोरोस्ट्रियन अस्थिकलश अउर तुर्क क़ब्र-चिन्ह (बलबाल) कॆ अवशेष मिलत हीं। बौद्ध मूर्तियन, स्तूप अउर मंदिर कॆ मलबा ई नगर कॆ सांस्कृतिक अदला-बदली कॆ विस्तृत कहानी बतावत हय। ७वीं सदी कॆ ईसाई गिरजा अउर १०वीं सदी कॆ मठ कॆ अवशेष भी सुइयाब कॆ धार्मिक विविधता कॆ संकेत देत हीं।[]

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