सुनीता नारायण
| सुनीता नारायण | |
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Narain in 2009 | |
| अल्मा मेटर | University of Delhi |
| रोजगार | Environmentalist |
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| परिवार | cseindia |
सुनीता नारायण (जनम १९६१) एक भारतीय पर्यावरणविद् अउर राजनीतिक कार्यकर्ता बाड़ी, संगे ही उ टिकाऊ विकास के हरित अवधारणा की एक परमुख समर्थक भी बाड़ी। नारायण भारत मा स्थित सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट की महानिदेशक, सोसायटी फॉर एनवायरनमेंटल कम्युनिकेशंस की निदेशक, अउर पाक्षिक पत्रिका 'डाउन टू अर्थ' की संपादक बाड़ी।सन २०१६ मा नारायण का टाइम पत्रिका के १०० सबसे परभावशाली लोगन की सूची मा जगह मिली। उ सन २०१६ की डॉक्यूमेंट्री 'बिफोर द फ्लड' मा लियोनार्डो डिकैप्रियो के साथे परकट भईं, जहाँ उनहन भारत मा जलवायु परिवर्तन के मानसून पर परभाव अउर एसे किसानन पर होए वाले असर पर बातचीत किहिन।
बचपन अउर सुरुआती जिनगी
[सम्पादन | स्रोत सम्पादित करैं]सुनीता नारायण का जनम सन १९६१ मा नई दिल्ली मा भवा, अउर उ चार बहिनियन मा सबसे बड़ी रहीं। उनके बाबा राज नारायण, जिनकी मृत्यु तब भई जब नारायण मात्र ८ बरिस की रहीं, एक स्वतंत्रता सेनानी रहे अउर बाद मा उनहन एक हस्तशिल्प व्यवसाय खड़ा किहिन। उनकी माई उषा नारायण उ व्यवसाय सँभालिन अउर सब बच्चावन का पाल-पोसिके बड़ा किहिन। व्यवसाय की आमदनी से परिवार का आरामदेह जिनगी मिली। सन १९७९ मा सुनीता नारायण छात्र पर्यावरण कार्यकर्ता समूह 'कल्पवृक्ष' से जुड़िन। उनहन स्मिथसोनियन पत्रिका के मार्सेलो रोस्सी का बताइन कि एसे उनकी जिनगी का एक नया रास्ता मिला, काहेकि उनका समझ मा आवा कि "असली बात पेड़ नाहीं, बल्कि उन पेड़न पर लोगन के हक की बा।" उनहन दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्राचार के जरिए सन १९८०-८३ मा आपन स्नातक पूरा किहिन।
करियर
[सम्पादन | स्रोत सम्पादित करैं]नारायण दिल्ली विश्वविद्यालय मा पढ़त हुए ही भारत के पहिले पर्यावरण गैर-सरकारी संगठनन मा से एक, सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट, मा काम करे लगिन। उनहन संस्थापक अनिल अगरवाल के साथे काम किहिन। सन १९९३ मा नारायण CSE की उप-निदेशक बनिन, अउर सन २००० मा उनका निदेशक नियुक्त कइ गवा।
जलवायु परिवर्तन पर वैज्ञानिक सहमति का मानत हुए नारायण जलवायु संकट खातिर पश्चिमी देसन की जीवाश्म ईंधन पर आधारित अर्थव्यवस्थावन का दोषी मानत बाड़ी, अउर वकालत करत बाड़ी कि भारत का आर्थिक विकास का एक वैकल्पिक रास्ता खोजे के चाही। उनकी अगुवाई मा सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट कोक अउर पेप्सी जइसे अमेरिकी कोल्ड ड्रिंक ब्रांडन मा भारी मात्रा मा कीटनाशकन की मौजूदगी उजागर किहिन।
सन २०१२ मा उनहन भारत के पर्यावरण की ७वीं स्थिति रिपोर्ट 'एक्सक्रीटा मैटर्स' लिखिन, जउन शहरी भारत की जलापूर्ति अउर परदूषण का एक विश्लेषण रहा।
सन २०१६ मा नारायण का टाइम पत्रिका के १०० सबसे परभावशाली लोगन की सूची मा जगह मिली। उपन्यासकार अमिताव घोष टाइम खातिर लिखिन कि उनहन सन १९९१ मा जउन सह-लेखित पेपर लिखा, उ आज भी वैश्विक जलवायु-न्याय आंदोलन का बुनियादी दस्तावेज बना हुआ है। नारायण लगातार उस किसिम के अभिजात वर्गीय पर्यावरणवाद का विरोध करत बाड़ी जउन पर्यावरण की समस्यावन खातिर गरीबन का दोषी ठहरावत है।
नारायण सन २०१६ की डॉक्यूमेंट्री 'बिफोर द फ्लड' मा लियोनार्डो डिकैप्रियो के साथे परकट भईं अउर भारत मा जलवायु परिवर्तन के मानसून पर परभाव अउर किसानन पर एके असर के बारे मा बातचीत किहिन। सन २००५ मा उनहन परधानमंत्री के निर्देस पर टाइगर टास्क फोर्स की अध्यक्षता किहिन, जेका एक संरक्षित छेत्र से बाघन के लुप्त होए के बाद देस मा संरक्षण खातिर एक कार्ययोजना बनावे खातिर गठित किया गया रहा। उ राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण की भी सदस्य रहीं, जेका तत्कालीन परधानमंत्री नदी के संरक्षण अउर सफाई खातिर परभावी उपाय विकसित करे हेतु स्थापित किहिन रहे।
सन २००८ मा नारायण के. आर. नारायणन व्याख्यान मा "पर्यावरणवाद का इक्विटी की जरूरत काहे है: हमार साझा भविष्य बनावे खातिर गरीबन के पर्यावरणवाद से सीखना" विषय पर बोलिन। सन २०२० मा उनहन WHO-UNICEF-लैंसेट आयोग "दुनिया के बच्चावन का एक भविष्य?" मा काम किहिन, जेकी सह-अध्यक्षता हेलेन क्लार्क अउर अवा कॉल-सेक करत रहीं।
सन २०२१ मा टाइम पत्रिका उनका एक सर्वेक्षण मा सामिल किहिन, जेमा अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञन से पूछा गवा कि भविष्य की महामारी रोके खातिर कउन उपाय सबसे जरूरी हैं। नारायण पारिस्थितिकी तंत्र की रक्छा अउर खाने की आदतन मा बदलाव जइसे उपायन का कम परमुखता दिए जाए पर चिंता जताइन। उनहन फैक्ट्री खेती, वायु परदूषण, साफ पानी अउर उचित स्वच्छता की कमी जइसे पर्यावरणीय मुद्दन का संक्रामक रोगन के बढ़त फैलाव का कारन बताइन।
सन २०२१ से उ क्लब ऑफ रोम के २१वीं सदी के परिवर्तनकारी आर्थिक आयोग की सदस्य बाड़ी, IDDRI की सामरिक सलाहकार परिषद मा सेवा दे रही बाड़ी, अउर पेरिस स्कूल ऑफ इंटरनेशनल अफेयर्स मा होस्ट टिकाऊ विकास अउर जलवायु परिवर्तन खातिर यूरोपीय चेयर की वैज्ञानिक समिति की सदस्य बाड़ी। सन २०२३ मा नारायण COP28 सलाहकार समिति मा सामिल रहीं। सन २०२३ से उ CIFOR-ICRAF के साझा न्यासी बोर्ड की सदस्य अउर वेलकम ट्रस्ट की जलवायु सोध साझेदारी सलाहकार समिति की अध्यक्ष के रूप मा सेवा दे रही बाड़ी।
निजी जिनगी
[सम्पादन | स्रोत सम्पादित करैं]२० अक्टूबर २०१३ की सुबह नारायण अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के नजीक साइकिल चलावत हुए एक यातायात दुर्घटना मा घायल होइ गइन। उनकी साइकिल का एक कार टक्कर मार दिहिस, जब उ ग्रीन पार्क मा आपन घर से लोधी गार्डन जात रहीं। कार चालक रुका नाहीं अउर एक राहगीर उनका AIIMS लइ गवा। उनका चेहरे पर जख्म अउर हड्डियन मा चोट आई। ११ दिन बाद, नाक की पुनर्निर्माण शल्यक्रिया अउर टूटी हुई कलाइयन का सहारा देए खातिर दू धातु की छड़ें लगाए जाए के बाद उनका छुट्टी मिली।
पुरस्कार
[सम्पादन | स्रोत सम्पादित करैं]- सन २००४ मा नारायण का "पर्यावरणीय मुद्दन का मुख्यधारा मा लाए खातिर" चमेली देवी जैन उत्कृष्ट महिला मीडियाकर्मी पुरस्कार मिला।[]
- अगले बरिस भारत सरकार उनका पद्म श्री से सम्मानित किहिस, अउर उनकी अगुवाई मा सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट का स्टॉकहोम वाटर पुरस्कार मिला।[]
- सन २००९ मा उनका कलकत्ता विश्वविद्यालय से मानद डॉक्टर ऑफ साइंस की उपाधि मिली, अउर चेन्नई के श्री राजा-लक्ष्मी फाउंडेशन से राजा-लक्ष्मी पुरस्कार भी मिला।[]
- सन २०१६ मा नारायण टाइम पत्रिका के १०० सबसे परभावशाली लोगन की सूची मा सामिल भईं, अउर उनका अंतरराष्ट्रीय मीडिया एवं संचार सोध संघ जलवायु परिवर्तन संचार सोध पुरस्कार मिला।[]
- सन २०२० मा उनका एडिनबर्ग मेडल मिला।
- नारायण का लॉज़ेन विश्वविद्यालय अउर अल्बर्टा विश्वविद्यालय से भी मानद डॉक्टरेट मिली बाड़ी।
परकासन (Publications)
[सम्पादन | स्रोत सम्पादित करैं]- टुवर्ड्स ग्रीन विलेजेस (१९८९)
- ग्लोबल वार्मिंग इन एन अनइक्वल वर्ल्ड: पर्यावरणीय उपनिवेशवाद का एक मामला (१९९०)
- टुवर्ड्स अ ग्रीन वर्ल्ड (१९९२)
- ग्रीन पॉलिटिक्स: वैश्विक पर्यावरणीय वार्ताएँ
- डाइंग विजडम: भारत के जल संग्रह तंत्रन का उदय, पतन अउर संभावना
- भारत के पर्यावरण की स्थिति — नागरिकन की पाँचवीं रिपोर्ट
- मेकिंग वाटर एवरीबडीज बिजनेस: जल संचयन की व्यवहार अउर नीति
- कॉन्फ्लिक्ट्स ऑफ इंटरेस्ट: भारत के हरित आंदोलन से होके मेरी यात्रा (पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया, २०१७)
- भारत मा बाघन की वापसी: महत्वपूर्ण आत्ममंथन अउर संभावित सबक
सन्दर्भ
[सम्पादन | स्रोत सम्पादित करैं]- https://zeenews.india.com/news/nation/sunita-narain-presented-chameli-devi-jain-award_209375.html
- https://stockholmwaterfoundation.org/stockholm-water-prize/
- https://web.archive.org/web/20090819162938/http://www.hindu.com/2009/08/15/stories/2009081558042200.htm
- https://iamcr.org/awards/climate2016-awarded