होली (रंगों का पर्व)
होली एक प्राचीन अऊर महत्वपूर्ण हिन्दू त्योहार है जवन फलगुना महीना के पूर्णिमा के दिन मनावा जात है। ई वसंत के आगमन अऊर जाड़ा के अंत का चिह्नित करत है। होली का रंगन का त्यौहार कहा जात है काहे से कि यहिमा मड़ई आपस मा रंग अउर गुलाल अउर से खेलत हैं। ई त्योहार न केवल धार्मिक महत्व रखत है बल्कि सामाजिक सद्भाव अऊर सांस्कृतिक एकता का प्रतीक भी है।[१]
परिचय
[सम्पादन | स्रोत सम्पादित करैं]होली का महत्व भारतीय संस्कृति में गहराई से रचा-बसा है। ई लगभग सब भारतीय राज्यन मा मनावा जात है, हालांकि हर क्षेत्र मा उत्सव अलग-अलग होत है। होली खाली एक धार्मिक घटना नाहीं है; ई एक महत्वपूर्ण त्योहार है जवन भारतीय समाज के संस्कृति, परम्परा अऊर मूल्यन का दर्शावत है। ई त्योहार मा कईयो तरह के धार्मिक, पौराणिक, कृषि अऊर वैज्ञानिक आधार हैं।
नाम अऊर व्युत्पत्ति
[सम्पादन | स्रोत सम्पादित करैं]होली शब्द कय व्युत्पत्ति संस्कृत शब्द 'होलक्का' से जुड़ी अहै। वैदिक काल मा 'होलक्का' वै भोजन माना जात रहा जवन देवतन कै मुख्य भोजन रहा। भासाई दृष्टि से ‘होलिका’ सबद कै कइयौ व्याख्या दीन गै अहै। एक व्याख्या के अनुसार 'होलिका' विनाशकारी या नकारात्मक शक्ति का प्रतीक है। दूसर व्याख्या मा होलिका शब्द होमा से सम्बन्धित है जेकर मतलब है बलिदान। संस्कृत के ग्रंथन मा होली का 'होलिका महोत्सव' औ 'वसंत महोत्सव' भी कहा जात है। बंगाल मा होली का 'डोल यात्रा' अऊर 'डोल पूर्णिमा' के नाँव से जाना जात है, जबकि बिहार मा 'फागू' या 'फगुआ' कहा जात है।