अवधी भाषा

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अवधी भारतीय आर्य भासा परिवार कै भासा हुवै। ई भासा खास कैके अवध इलाका (उत्तर प्रदेश) मा बोली जात है। यहि भासा क बोलै वाले मध्य प्रदेस, दिल्ली अउर नेपालौ मा अहैं। वैसे थोरक् लहजा के बदलाव के साथ इहै भासा अवध के ब्रज, बुंदेली अउ बघेली भासा के परभाव वाले इलाकन मा अउर वत्स इलाका(निचलका दोआब) मा मिले। इहै रूप(लहजा कै भेद) अवध के दक्खिनी हिस्सन(कानपुर अउ इलाहाबाद सामिल) मा देखाये। यहै भासा कयिउ कैरेबी देसन मा मौजूद अहै जहाँ ई भासा उन गिरमिटिया मजूरन के जरिये गै जे अंगरेजन के सासन मा यूपी से भेजा गा रहे। सन २००१ के आकड़न के मुताबिक संसार के नेटिब बोलैयन मा यहि भासा कै वनतिसौहाँ(29-th) अस्थान अहै। मुल्ला दाउद कै चंदायन, तुलसीदास कै रामचरितमानस, जायसी कै पद्मावत जैसी बड़ी-बड़ी रचनैं अवधी मा कीन गयीं। धार्मिक साहित्य अउर चालीसा (जैसे हनुमान चालीसा) यहि भासा मा काफी हैं। अवधी बोलै वाले लगभग चारि करोड़ हैं। यहिमन अधिकतर लोगन कै अवधी पहिल भासा है, दुसरी भासा नाय! अवधी लिखै कै तरीका यानी लिपि ज्यादातर देवनागरी है, कुछ समय पहिले देवनागरी अउर कैथी दुइनिउ रही, कुछ लोगै दुइनौ कै मिला जुला रूप लिखत रहे। अवधी अवध के इन हिस्सन मा बोली जात है: लखनऊ, जौनपुर, उन्नाव, रायबरेली, फैज़ाबाद, गोन्डा, प्रतापगढ़, सुलतानपुर, बहराइच, स्रावस्ती, बलरामपुर, बाराबंकी, फतेहपुर यकरे बहिरे निचलके दोआब के इन हिस्सन मा: कानपुर सहर, फतेहपुर, कौसाम्बी, इलाहाबाद... इन जनपदन मा: लखीमपुर खीरी(पछाहीं हिस्सा नाय), सीतापुर (पछाहीं हिस्सा नाय), अंबेडकर नगर(पूरबी हिस्सा नाय), संत रविदास नगर(पूरबी हिस्सा नाय)...नेपाल देस के इन भागन मा: लुम्बिनी जोन, नवलपरासी जिला, कपिलवस्तु जिला, रूपमदेही जिला, राप्ती जोन, दाँग देउखुरी जिला, भेरी जोन, बाँके जिला, बर्दिया जिला। १९९० के पहिले केरी हिन्दी फिल्मन मा अवधी भासा कै काफी परभाव मिले। कयिउ हिन्दी फिल्मन मा अवधी बोलिउ गै है, जैसे लगान, पिपलीलाइव, अनताब बच्चन (अमिताभ बच्चन) मादरी जुबान के तौर पै कयिउ फिल्मन अउर गानन मा बोलै मा अवधी कै इस्तेमाल किहे हैं, जैसे होली खेलैं रघुबीरा (बागवान), एक रहेन ईर एक रहेन बीर (भूतनाथ) आदि।

अवधी लोक साहित्य अवधी लोक साहित्य की एक समृद्ध परम्परा है। अवधी लोक साहित्य पर कई शोध हुए हैं। इनमें कुछ प्रमुख हैं- अवधी लोक साहित्य -डा॰ सरोजनी रोहतगी (१९७१)